विधायक द्वारा दी गई राशि वापस लेना जनता के साथ छलावा
बृजेश पाण्डेय
मुंगराबादशाहपुर (जौनपुर)। कोरोनावायरस के संक्रमण से निपटने के लिए मुंगराबादशाहपुर की विधायक सुषमा पटेल द्वारा पहले विधायक निधि से पांच लाख की राशि अवमुक्त करने के बाद दी गई राशि को पुनः वापस ले लेने के पीछे वह चाहे जो भी तर्क दे रहीं हों लेकिन उनके तर्कों को क्षेत्र की जनता सिरे से खारिज करते हुए इसे जनता के साथ छलावा करार दिया है । लोगों का कहना है कि विधायक सुषमा पटेल द्वारा विधायक निधि से दी गई राशि उनकी अपनी निजी राशि नहीं थी। दूसरी बात यह है कि यदि उन्हें विधायक निधि से दी गई पांच लाख की राशि वापस लेनी ही थी तो क्या सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए सो बाजी कर अपनी दरियादिली दिखाते हुए उन्होंने पहले धन अवमुक्त किए जाने का पत्र दिया था । फिर जब जनता उनकी इस दरियादिली पर विस्वास करना शुरू किया


तो उन्होंने गुपचुप तरीके से अवमुक्त की गई विधायक निधि की राशि वापस लेने का पत्र भेज दिया। यह क्षेत्र के लोगों की आवाज है । लोगों का तो यह भी कहना है कि लाक डाउन के दौरान पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी अजय शंकर दुबे अज्जू अपनी हार हो जाने के बाद भी मुंगराबादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र की जनता के सुख-दुख में जहां मौजूद रहकर तन मन धन से गरीबों मजलूमों एवं असहायों की सहायता कर रहे हैं । समाजसेवी पशुपति नाथ गुप्त ,अजय सिंह उर्फ पप्पू सिंह ,सपा नेता राजेन्द्र बहादुर यादव , विहिप नेता विश्वम्भर दुबे सहित अन्य लोग जहां लाक डाउन के दौरान गरीबों मजदूरों एवं असहायों की हर संभव सहायता करने में लगे हैं वहीं मुंगराबादशाहपुर की विधायक सुषमा पटेल क्षेत्र में आने की बजाय जनता को उनके भाग्य के भरोसे छोड़ दिया है । जब उनकी ही पार्टी के एक कार्यकर्ता ने उनके गायब होने की सूचना सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया तो विधायक ने अपने अधिकार का दुर्पयोग कर अपने ही कार्यकर्ता के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत करा दिया । हिन्दी दैनिक भारतीय सहारा संवाददाता बृजेश पाण्डेय ने जब इस प्रकरण पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश किया तो लोगों ने विधायक सुषमा पटेल के इस कृत्य की निन्दा करते हुए इसे जनता के साथ छलावा करार दिया ।
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विधायक को ऐसा नहीं करना चाहिए था – एक जनप्रतिनिधि होने के कारण मुंगराबादशाहपुर विधायक सुषमा पटेल को ऐसा नहीं करना चाहिए था । कोरोनावायरस के बढ़ते प्रभाव को रोकने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए लाक डाउन में शासन प्रशासन के साथ ही क्षेत्र के समाजसेवियों द्वारा गरीबों मजलूमों एवं असहायों को समस्याओं से निजात दिलाने हेतु सार्थक प्रयास किया गया । जिसके तहत हमारे द्वारा भी क्षेत्र में जाकर गरीबों की यथा संभव मदद किया गया और किया जा रहा है । लेकिन एक जनप्रतिनिधि होने के कारण विधायक सुषमा पटेल जी को भी क्षेत्र की जनता की मदद करनी चाहिए थी ।जिसे उन्होंने नहीं किया । लेकिन विधायक निधि से धन अवमुक्त करने के बाद उसे वापस लौटने के लिए पत्र भेजकर वापस ले लेना उचित नहीं कहा जा सकता है । विधायक निधि की राशि विधायक की निजी राशि नहीं होती । उन्होंने कहा कि यदि उन्हें यह राशि वापस लेनी ही थी तो धन अवमुक्त ही नहीं करना चाहिए था ।यह जनता के साथ छलावा नहीं तो और क्या है ।
अजय शंकर दुबे अज्जू
पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी – मुंगराबादशाहपुर
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विधायक सुषमा पटेल द्वारा कोरोना संक्रमण के उपचार हेतु विधायक निधि से पहले धन अवमुक्त करना फिर वापस ले लेना यह उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं । जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है । विधायक सुषमा पटेल ने जो धन कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने वालों के उपचार के लिए धन अवमुक्त किया था वह जनता का पैसा है ना की विधायिका जी का । हम इसकी मो जम्मत करते हैं ।
तहसीमुल हक बन्ने
पूर्व सांसद प्रतिनिधि
मुंगराबादशाहपुर
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कोविड 19 कोरोना के संक्रमण के उपचार हेतु विधायक सुषमा पटेल द्वारा विधायक निधि से पांच लाख रुपए अवमुक्त कर सराहनीय कार्य किया था लेकिन पुनः वापस ले कर जो कार्य किया है इसे उचित नहीं कहा जा सकता । यदि वह अपनी निजी राशि से भी दी होती फिर भी वापस नहीं लिया जाना चाहिए था फिर यह तो विधायक निधि की राशि थी ।जो जनता का जनता के बिकास के लिए होता है । यदि विधायक निधि को कोई भी विधायक अपनी निधि समझता है तो यह उसकी भूल ही होगी । विधायक सुषमा पटेल इसके पीछे चाहे जो भी तर्क दे रहीं हों लेकिन हमारे विचार से उन्होंने यह जो कार्य किया उसकी जितनी भी निन्दा की जाय कम होगी । इसे जनता कभी भी मांफ नहीं करेंगी ।यह तो सीधे सीधे जनता के साथ छलावा है । जिसकी हम कड़ी निन्दा करते हैं । उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था ।
मृत्युंजय सिंह मुकुंद
प्रधानाचार्य
मां कमला देवी इण्टर कालेज जयपाल पुर मुंगराबादशाहपुर
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मुंगराबादशाहपुर विधायक सुषमा पटेल द्वारा कोरोना महामारी के रोकथाम के लिए अपने विधायक निधि से दिया गया पैसा पुन: वापस मांग लेना निन्दनीय है । अपने पक्ष में उनका कहना चाहे जो कुछ भी हो लेकिन विधायक निधि वापस मांगना उनकी ओछी मानसिकता को उजागर करता है। जिले के चार विधायकों के अलावा जनपद के किसी अन्य विधायकों ने अपने विधायक निधि से दिये गये पैसो को वापस नही मांगा है।एक तरफ जनता कोरोना महामारी से जूझ रही है वही विधायक के इस आचरण को कहीं से भी उचित नही ठहराया जा सकता है। जनता के साथ छलावा करने वाले ऐसे विधायक दोबारा चुने जाने लायक नही है। विधायको को विधायक निधि वापस लेने का पत्र नही लिखा जाना चाहिये था।
ई० राम सूरत पटेल
ललहरिया मुंगराबादशाहपुर
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जनता के साथ विश्वासघात।
विधायक मुंगराबादशाहपुर द्वारा कोरोंना वैश्विक महामारी के उपचार हेतु जो धन दिया गया था उसे वापस लेना जनता के साथ विश्वासघात है क्योंकि विधायक निधि भी सरकार द्वारा जनप्रतिनिधि को समाज/जनता के विकास हेतु वार्षिक प्रदान कि जाती है वर्तमान समय पूर्णतया संकट का समय है,जिसमें जहां एक तरफ अनेक स्वयं सेवी संस्था/समाजसेवियों द्वारा राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानकर व्यक्तिगत रूप से तन मन धन से संकट से निजात पाने हेतु पूर्णतया समर्पित है वहीं दूसरी तरफ विधायक द्वारा सरकार द्वारा वैधानिक रूप से जनता के हितार्थ प्रदान कि जाने वाली निधि को संकट के समय वापस लेना पूर्णतया उस निधि पर व्यक्तिगत प्रभुत्व दर्शित करता है जो जनता के साथ पूर्णतया विश्वासघात है,इसकी जितनी निंदा कि जाए वह कम है।
मदन कुमार तिवारी
अधिवक्ता
मुंगराबादशाहपुर
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अगर कोई भी विधायक या सांसद अपनी निधि कोरोना संक्रमण के उपचार हेतु दान स्वरूप दे चुके है तो उन्हें बिल्कुल भी वापस नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि आज का मामला देश सेवा से है जो भी लोग सहयोग कर रहे है वो देश के लिए और देश के लोगो के लिए कर रहे है हमने भी अपने कमाई के अनुसार हमसे जो बन पड़ता है सहयोग किया है और अब इसको अगर हम वापस लेने के बारे में सोचे तो ये फिर अनुचित होगा ।
राजकुमार नेता
मुंगराबादशाहपुर
