कश्मीर हमारे देश की शान है – सुशील पंडित
शिवगढ़, प्रतापगढ़ । जय श्रीमन्नारायण प्रतापगढ़ विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा प्रतापगढ द्वारा अखिल भारतीय श्री चंद्र दत्त सेनानी ट्रस्ट भवन सभागार में कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत एवं वर्तमान परिस्थिति पर आधारित एक कार्यक्रम शिव प्रकाश मिश्र सेनानी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ ।
जिसमें मां सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण एवं पूजन अर्चन तथा दीप प्रज्वलन के बाद सुरेश दुबे द्वारा वीणापाणि की वंदना की गई कार्यक्रम में सर्वप्रथम असिस्टेंट सालिसीटर चंद्रभान पांडे द्वारा विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के उद्देश्यों की चर्चा की गई ।मुख्य अतिथि

दिल्ली से पधारे सुशील पंडित ने कहा कि कश्मीर हमारे देश की शान है जहां से ज्ञान का उद्गम गम हुआ है। पहले से ही कश्मीर को शारदा प्रदेश कहा जाता रहा है ।देश के लोगों में चेतना लाने के लिए विवेकानंद केंद्र विश्व स्तर पर कार्य कर रहा है। आगे कहा कि कश्मीर भारत की ज्ञान परंपरा का उद्गम है ,यही योग शब्द को सार्थक करने वाले पतंजलि, महर्षि पाणिनि, भरतमुनि ,आचार्य अभिनव गुप्ता, बिहारी लाल जैसे तमाम विचारक पैदा हुए। जिन्होंने भारत को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हम लोगों को संदेश दिया। हमें कश्मीर को पलायन से रोकना होगा संविधान की धारा 370 द्वारा संसद को पंगु बना देना शुभ सकेत नहीं है। सीमित अधिकारों सहित कश्मीर को आतंकियों के संरक्षण से मुक्ति दिलाना है ।यह मानवीय दृष्टिकोण कहता है ।
ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि कश्मीर का इतिहास महाभारत के काल से आज भी उपलब्ध है। गणपति यार तथा खीर भवानी का मंदिर पांडवों द्वारा स्थापित है ।यही पर स्वामी रामानुजाचार्य 25000 ग्रंथों जिनकी रचना बोधयन ने की थी । शारदा पीठ से प्राप्त करके अपने शिष्य कुरेश स्वामी के साथ अध्ययन किया था। कूरेश स्वामी उन 25000 ग्रंथों को याद करके गए थे ,और उसी से बोधायन वृत्त की रचना की गई ।यहां पर ऋषि परंपरा ,त्रिखा शास्त्र एवं सूफी इस्लाम का संगम मिलता है, जो कश्मीरियत का सगंम है ।भारतीय लोकाचार की सांस्कृतिक प्रशाखा कट्टरवादिता नहीं है आतंकवादी कश्मीर के अंदर अशांति पैदा कर रहे हैं और सरकार सही ढंग से निर्णय नहीं ले पा रही है ।
वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ वहां की मुख्यमंत्री कहती हैं सीजफायर बंद करो केंद्र सरकार कहती है सीजफायर होगा और दूसरी तरफ सरकार कहती है कि आतंकवादी चाहे जो भी घटना करें रमजान के महीने तक उनके खिलाफ कार्यवाही न की जाए। यह कथनी और करनी में फर्क दर्शाता है। धारा 370 आज भी सुरसा के मुंह की तरह खड़ी है। विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों जिनके द्वारा कश्मीर की संस्कृति विद्यमान थी आज नष्ट हो गई है। इस पर जनमानस को एवं सरकार को विचार करना होगा ।कार्यक्रम में मुख्य रूप से भानु प्रताप त्रिपाठी मराल, दयाराम मौरया, अर्जुन सिंह ,दिवाकर दिग्गज, सूर्यकांत निराला ,लक्ष्मी कांत द्विवेदी ,हरिवंश शुक्ल, प्रेम कुमार त्रिपाठी ,अशोक, इंजीनियर विशाल नाथ त्रिपाठी ,अजय क्रांतिकारी ,पूनम इंसान डीं पी इसान ,विभा मिश्रा ,श्रीमती अनुपमा पांडे ,आनंद मोहन ओझा ,प्रधान संघ के अध्यक्ष बाबा बृजेंद्र सिंह ,अनुज कुमार पांडे ,अवधेश त्रिपाठी ,रमाशंकर त्रिपाठी ,कुसुम बाला , तृप्ति सिंह, ज्योति जायसवाल, रेनू द्विवेदी, राज नारायण शुक्ला “राजन” हरकेश सिंह ,मनोज ब्रह्मचारी, अशोक शर्मा सहित अनेको लोग उपस्थित रहे।
अंत में शिवप्रकाश मिश्रा सेनानी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इसी तरह से जनमानस को कश्मीर की संस्कृति और उसकी विरासत के विषय में जानकारी दी जाए तो जनता का सरकार पर दबाव पड़ेगा ।उससे केंद्र सरकार बाध्य होकर धारा 370 को हटाएगी और आतंकवाद का सफाया किया जा सकेगा ।संचालन परशुराम उपाध्याय एडवोकेट सुमन ने किया ।
