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मदनमोहन मालवीय के रूप थे डीआईजी पं.काशी प्रसाद त्रिपाठी- सीमा द्विवेदी

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एक कुशल दूरदर्शी थे डीआईजी साहब वे छोटी छोटी बातों से लोगों को बड़ी शिक्षा दे देते थे- इंदु प्रकाश त्रिपाठी

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सुनील मिश्रा की रिपोर्ट

सुजानगंज, जौनपुर। रविवार को राष्ट्रीय पीजी कालेज के संसथापक/प्रबंधक तथा डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए स्व.पं. काशी प्रसाद त्रिपाठी जी की पूण्यतिथि के अवसर पर महाविद्यालय में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन रहा। कार्यक्रम में आए लोगों ने महाविद्यालय के संस्थापक व सेवानिवृत्त डीआईजी साहब द्वारा जीवन मे किए गए अनेकानेक जनसहयोग, समाजसेवा व क्षेत्र के विकास के कार्य, जनउथ्थान के लिए उनके त्याग व तपस्या बलिदान आदि कृतित्व व्यक्तित्व पर बड़ी ही मार्मिकता से सुंदर बातें रखते हुए लोगों से साझा किया गया।
अपनी बाते रखते हुए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहीं राज्यसभा सांसद श्रीमती सीमा द्विवेदी ने कहा- यह कहना शायद ही कम होगा कि स्वर्गीय पंडित काशी प्रसाद त्रिपाठी हम सबके मदन मोहन मालवीय थे। वे एक अच्छे संस्थापक प्रबंधक होने के साथ अनेक अच्छे गुणों को आत्मसात किए समाजसेवी जनसहयोगी विचारधारा के धनी व्यक्ति थे। डीआईजी साहब पुरुष नही वरन महान पुरुष थे। डीआईजी साहब के उपर उदाहरण देते हुए सांसद जी ने एक छोटी सी कहानी से उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक नाव थी और उस में बहुत सारे लोग सवार थे जिसमें महत्वपूर्ण कुछ पुस्तकें और अन्य महत्वपूर्ण चीजें रखी हुई थी। नव में कुछ खराबी के कारण मजधार में आचानक डूबने की नौबत आगई, नाव का चालक (नाविक) ने लोगों से कहा कि इसमें कुछ वजनाई कम हो तो सब बच सकते हैं इस लिए रखी गई पुस्तकों व महत्वपूर्ण सामान को फैंक दिया जाए तो वजनाई कम होने से डुबने से बचा जा सकता है। यह बात सुन उसमें बैठे महान पुरुष ने कहा कि किताबों को बाहर मत फैकिए इस से आने वाली पता नहीं कितनी पीढी के लोगों के भविष्य को सवारा जा सकेगा। हमारा जीवन पूर्ण हो चुका है और हम इस नाव से कुद जाते बहुत ज्यादा वजनाई कम हो जाएगी। इतने बड़े त्याग को कर दिया पीढियों को सवारने व लोगों के बचाने के लिए। विल्कुल इसी तरह पं. काशी प्रसाद त्रिपाठी जी थे। आगली कड़ी बच्चों को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने कहा बच्चों आप आज आप लोग यहां हैं कल कोई अधिकारी होगा तो कोई नेता होगा कोई बड़े पद पर जाएगा लेकिन हमेशा यह मन में जरूर रखिएगा कि अपनी मातृभूमि पर ध्यान रखिएगा। कभी मातृभूमि को भूलिएगा नही।
अगली कड़ी में विशिष्ट अतिथि इंदु प्रकाश त्रिपाठी ने कहा स्वर्गीय श्री काशी प्रसाद त्रिपाठी डीआईजी साहब जीवन पर्यंत कुछ ना कुछ सीखते सिखाते उनके द्वारा छोटी छोटी बातें भी बड़ी शिक्षा दे दिया करती थी। उसी कड़ी में विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त प्रवक्ता रमाकांत चतुर्वेदी ने कहा श्री डीआईजी साहब पुलिस विभाग में रहते हुए भी धर्मशास्त्र, कर्म योगी जैसे लक्षण हमेशा जीवन के अंतिम समय तक विद्यमान रहे उन्होंने हमेशा छोटे, बड़े, तथा मध्यम वर्ग के लोगों को एक समान रूप से देखते हुए सहयोग किया है वे मानव नहीं महामानव थे जिनके कार्यों से प्रेरणा लेकर हम लोग बेहतर करने के लिए हमेशा प्रेरित होते रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी द्वारा की गई। कार्यक्रम को बहुत ही सुंदर रूप से सम्पन्न कराने में महाविद्यालय के प्रबंधक वेदप्रकाश त्रिपाठी व महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डा.राकेश पाण्डेय का महत्वपूर्ण योगदान तथा भूमिका रही।कार्यक्रम का संचालन पीजी कालेज के शिक्षक श्री पाल जी द्वारा की गई। कार्यक्रम बड़ी संख्या में क्षेत्र के सभ्रांत जानो के साथ महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं, छात्र छात्राएं, विद्यालय परिवार के लोग तथा क्षेत्रीय लोगों की उपस्थिति रही।

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