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जीरो टॉलरेंस नीति से प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में आई गिरावट : मुख्यमंत्री

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शिक्षा के अधिकार का विस्तार कक्षा 12वीं तक हो
बाल अपराधों को रोकने में बाल अधिकार संरक्षण————————————————–

आयोग की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, पोक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम
राज्य स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का किया शुभारंभ

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आयोग की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, पोक्सो एक्ट और किशोर न्याय अधिनियम
राज्य स्तरीय जागरूकता कार्यशाला का किया शुभारंभ

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में गिरावट आई है। यह स्पष्ट रूप से राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का परिणाम है। हम सुरक्षा, सशक्तिकरण और न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर सुदृढ़ कर रहे हैं, जिससे अपराधों पर अंकुश लगा है। पिछले वर्षों में महिला एवं बाल अपराधों के प्रति सरकार की सख्ती स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के विरूद्ध गंभीर अपराधों के दोषियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। न्यायालयों द्वारा 48 प्रकरणों में मृत्युदंड के निर्णय दिए जा चुके हैं। सरकार और समाज मिलकर महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अत्याचारों के प्रति जागृति लाएं। इस कार्य में बाल संरक्षण आयोग की भूमिका भी अहम है। सरकार आयोग के सुझावों को अमल में लाने के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में यह बातें कही।

कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों से विभिन्न विभागों के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य समेत अन्य सदस्यों ने निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम-2009, पॉक्सो अधिनियम-2012 तथा किशोर न्याय अधिनियम-2015 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती निर्मला भूरिया, सदस्य बाल संरक्षण आयोग श्रीमती मेघा पवार और डॉ. निवेदिता शर्मा, डॉ. निशा सक्सेना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश, स्वर्णिम काल में प्रगति के पथ पर अग्रसर है। विश्व में भारत की ख्याति फैल रही है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में प्रत्येकव्यक्ति निरंतर समर्थ हो रहा है। भारत बाहरी दुश्मनों से निपटने में सक्षम होने के साथ-साथ आंतरिक चुनौतियों का भी प्रभावी रूप से सामना कर रहा है। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों और किशोरों में अपार क्षमता और ऊर्जा विद्यमान रहती है। इसीलिए महर्षि विश्वामित्र ने असुरों का विनाश करने के लिए महाराज दशरथ से बचपन में प्रभु श्रीराम और श्री लक्ष्मण को मांगा था। प्रभु श्रीराम ने अपने पुरुषार्थ के बल पर असुरों का सर्वनाश किया। भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण का बाल्य स्वरूप सद्मार्ग पर चलने के लिए समाज को भिन्न-भिन्न रूप से प्रेरित करता है।

जरूतमंद बच्चे जो आप तक नही आ पाये, उन तक आप पहुंचें : सुश्री भूरिया

महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने कहा की बच्चों के विकास की पहली शर्त उनका संरक्षण है और मुझे गर्व है कि डॉ. यादव के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण के लिये विभाग और प्रशासन सजग है। उन्होंने मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को बधाई देते हुए कहा कि आयोग बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, उनके संरक्षण और उनके समुचित विकास से जुड़े अधिनियम-नियम पर केन्द्रित इस राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला न केवल बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिये है वरन बच्चों के संरक्षण के लिये बनाये गये विभिन्न अधिनियमों जैसे पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम से जागरूक करने को लेकर भी है।

मंत्री सुश्री भूरिया ने उपस्थित बाल कल्याण आयोग और किशोर न्याय बोर्ड के अध्यक्ष/ सदस्यों से आग्रह किया कि उन्हें जो जिम्मेदारी दी गई है वो बहुत महत्वपूर्ण है और बच्चों को न्याय दिलाने के लिये है। समाज सेवा का ऐसा अवसर बार-बार नहीं मिलता इसलिये पूरी सजगता से बच्चों का संरक्षण सुनिश्चित हो इसका ध्यान रखें। आज अनाथ बच्चा किस संस्था में जायेगा या उसका पुनर्वास कहाँ होगा ये अधिकार आपके पास है और किसी के पास नहीं। तो इस अधिकार से बच्चों के प्रति संरक्षण के दायित्व मानकर उपयोग करें और कोशिश करें कि जरूतमंद बच्चे जो आप तक नही आ पाये उन तक आप पहुंचें। बच्चे ईश्वर का रूप होते हैं, बच्चे देश का भविष्य हैं और यदि हमें प्रधानमंत्री श्री मोदी के विजन अनुसार देश का भविष्य स्वर्णिम बनाना है तो आज के बच्चों और युवाओं के वर्तमान को भी संवारना होगा, संरक्षित करना होगा और मुझे खुशी है कि आज मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में न केवल बच्चों के वर्तमान को मजबूत बनाया जा रहा है वरन उन्हें सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि उनके व्यक्तित्व का अधिकतम विकास हो।

मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष श्री रवींद्र मोरे ने कहा कि जिला स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बाल कल्याण समिति के कार्यकर्ता की शक्तियां कम ज्यादा हो सकती हैं, लेकिन वे समान रूप से बाल कल्याण को समर्पित हैं और बच्चों के प्रति पूर्ण संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान में यह प्रावधान किया था कि राज्य सरकारों को बच्चों के कल्याण के लिए नियम बनाने का अधिकार मिलना चाहिए। यह उनकी दूरदर्शिता का घोतक है। मध्यप्रदेश सरकार ने बच्चों की शिक्षा की चिंता की है। श्री मोरे ने शिक्षा का अधिकार को 12वीं कक्षा तक लागू करने का सुझाव मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सामने रखा एवं कार्यशाला में सहभागिता के लिए उनका आभार माना।

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