बढ़ती मरीजों संख्या को देखकर भारी संख्या मे मुंबई से लोगों का पलायन
देवेश मिश्रा की रिपोर्ट
उल्हासनगर , मुंबई । महाराष्ट्र में कोरोना वायरस बीमारी के चलते मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर अन्य राज्यों के रहने वाले लोगों में अफरा तफरी मचने लगी है और लोग अपने गांव की तरफ पलायन करने लगे हैं । बता दें की दिल्ली हरियाणा जैसे तमाम राज्यों में मजदूरी व दिहाड़ी का काम करने वाले मजदूरों का काम बंद होने के चलते खाने के साथ रहने के भी लाले पड़ने लगे है वही हाल मुंबई व आसपास के शहर भिवंडी, ठाणे ,कल्याण ,डोंबिवली, अंबरनाथ बदलापुर ,खोपोली ,नई मुंबई पनवेल, नेरुल, पालघर , नालासोपारा ,वसई, विरार जैसे शहरों में रहने वाले लोग भी बड़े पैमाने पर अपने गांव उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश झारखंड बिहार जाने की तैयारी में लग गये हैं, और अधिकतर लोग पलायन भी कर चुके हैं, ध्यान देने की बात है की मुंबई समेत आसपास के शहरों में बड़े पैमाने पर उत्तर भारतीय समाज के लोग छोटी बड़ी कंपनियों में नौकरी करने के साथ रिक्शा चलाकर व ठेला गाड़ी से सब्जी फल फ्रूट बेचकर अपना व अपने परिवार की जीविका चलाते हैं, कोरोना वायरस के चलते महाराष्ट्र में कर्फ्यू लगा है, वही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल चक लॉक डाउन का आदेश जारी कर दिया है ,जिसके चलते लोगों को घरों से बाहर निकलना व धंधा व्यापार करना मुश्किल हो गया है, और उन्हें घर चलाने में दिक्कतें भी आने लगी है ,महाराष्ट्र में लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या से भी लोगों में भय का माहौल बनने लगा है, गौरतलब हो कि मुंबई मनपा प्रशासन जहां मुंबई के सभी क्षेत्रों में वायरस मारने की दवा का छिड़काव कर रही है, वही कल्याण डोंबिवली मनपा उल्हासनगर मनपा भिवंडी मनपा समेत नगर पालिका के उदासीन अधिकारी अभी भी लापरवाह बने नजर आ रहे हैं, जिसके चलते नागरिकों में वायरस बढ़ने का डर सताने लगा है, ध्यान देने की बात है कि कारखानों के बंद हो जाने से लोग भुखमरी की कगार पर आने की स्थिति में नजर आने लगे लोगों का कहना है कि कोरोनावायरस के चलते डर कर हम घरों में भुखमरी से मर जाएंगे ,क्योंकि उनके पास काम नहीं है, न तो खाने के लिए पैसे और परिवार के साथ मुंबई जैसे शहर में वह नहीं रह सकते हैं
बता दे की कोरोना वायरस के प्रभाव को रोकने के लिए राज्य सरकार ने पूरे राज्य में लाक डाउन कर धारा 144 कर्फ्यू लगा रखा हैं। जिसके कारण पूरा शहर का शहर ठप्प पड़ा हुआ हैं । दिहाडी मजदूरों को खाने के लाले पड़े हैं । रेल , बस ,ट्रक बंद होने के कारण मजबूर इन्हें अपने गांव पैदल ही जाना पड़ रहा हैं. ऐसा ही एक मंजर भिवंडी शहर में देखा गया। जिससे देखकर लोग हैरान रह गये हैं।
मिली जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के झबुआ जिला के लगभग 15 आदिवासी परिवार अंबरनाथ के झुग्गी झोपड़ियों में रहकर दिहाडी मजदूरी करके अपना परिवार पालता था। किन्तु कोरोना वायरस के कहर ने इनकी कमर तोड़ कर रख दी । इन्हें बेरोजगार बना दिया । दाने दाने के तरसने लगें. लाक डाउन में बस , ट्रेन , ट्रक बंद होने के कारण गाँव भी नहीं जा सकते थे।लगभग 15 परिवार एक साथ छोटे छोटे बच्चों को गोद में उठाकर कल्याण, भिवंडी ,वाडा , इंदौर के रास्ते मध्य प्रदेश जाने के लिए निकल पड़े. छोटे छोटे बच्चों के पैर में चप्पले तक नहीं थी. भिवंडी शहर में जब 15 परिवार एक साथ पहुँचा तो हाईवे पर तैनात भिवंडी पुलिस इन्हें खाना व पानी दिया। दोपहर बाद शहर के रास्ते वाडा के लिए निकल पड़े।वंजारपट्टी नाका पर पत्रकारों व समाजिक कार्यकर्ताओं की नजर इनके ऊपर पड़ी। इनकी कहानी सुनकर सब हैरान हो गये ।सामजिक कार्यकर्ताओं तथा पत्रकारों ने तत्काल पानी व बिस्कुट लाकर इन्हें दिया गया ।
इन्हीं में एक बासुरी राम ने बताया की हम सब अंबरनाथ में रहकर दिहाडी मजदूरी करते थे। किन्तु कोरोना वायरस के कारण सरकार ने लाक डाउन कर दिया हैं जिसके कारण काम ठप्प पड़ गया। हम लोगों के पास राशन खरीदने के लिए पैसा नहीं था। जिसके कारण हम सब पैदल ही गांव जा रहे है । रास्ते में जो भी कोई कुछ दे देता हैं वही खाकर फिर पैदल ही निकल पड़ते हैं।
