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शिक्षण संस्थान की आत्मा होता है पुस्तकालय: डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी

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रघुवीर स्वायत्तशासी महाविद्यालय में एक पुस्तक महाविद्यालय के नाम’ अभियान का हुआ शुभारंभ
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भारतीय सहारा संवाददाता

सुजानगंज (जौनपुर)। रघुवीर स्वायत्तशासी महाविद्यालय, थलोई में शुक्रवार को ज्ञान और पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी ने विभिन्न विभागों को निःशुल्क पुस्तकें भेंट कीं और पुस्तकालय के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. त्रिपाठी ने कहा, “पुस्तकालय किसी भी शिक्षण संस्थान की आत्मा होता है। पुस्तकें केवल जानकारी का स्रोत नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्र के भविष्य को दिशा देने का सशक्त माध्यम हैं।उन्होंने प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों से पुस्तकालय का नियमित उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि डिजिटल युग में भी भौतिक पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। पढ़ने की आदत विद्यार्थियों में ज्ञान, अनुशासन, चिंतनशीलता और नेतृत्व क्षमता का विकास करती है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता को समय की आवश्यकता बताया।
> **पूर्व छात्र स्वेच्छा से दान करें पुस्तकें: प्राचार्य*
> कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अश्विनी कुमार गुप्ता ने एक पुस्तक महाविद्यालय के नाम अभियान की विधिवत शुरुआत की। उन्होंने अपील की कि महाविद्यालय से उत्तीर्ण होने वाले (पास आउट) छात्र अपनी स्वेच्छा से अपने विभाग को कम से कम एक पुस्तक जरूर समर्पित करें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उन पुस्तकों से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने इसे ज्ञान के संवर्धन और कॉलेज लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने की एक सराहनीय पहल बताया।
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इस अवसर पर डॉ. नागेंद्र प्रसाद यादव, डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. प्रतिभा सहित महाविद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने इस अभियान को सफल बनाने तथा पुस्तकालय को समृद्ध करने का सामूहिक संकल्प लिया।

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