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बगैर सुनवाई मुकदमा खारिज करने से अधिवक्ता आक्रोशित; दिया धरनें का अल्टीमेटम

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राजेश पाठक की रिपोर्ट

बलिया। एसडीएम न्यायालय में बगैर सुनवाई किए पक्ष-विपक्ष को अनुपस्थित दिखा कर दर्जनों मुकदमों को खारिज कर दिए जाने से नाराज अधिवक्ताओं ने शनिवार को एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। अधिवक्ताओं ने ऐलान किया कि वह सात अप्रैल को सुबह 11 से तीन बजे तक एसडीएम न्यायालय गेट पर धरना देंगे।

तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता रामलाल सिंह, अजित सिंह, शिवजी सिंह, देवेंद्र मिश्र, रुद्रदेव कुंवर आदि ने बताया कि बीते 29 मार्च को जिन मुकदमों में डेट लगा था उस दिन न्यायालय खाली था और कोई पीठासीन अधिकारी न्यायालय में उपस्थित नहीं था। उक्त सभी मामलों में जनरल डेट पांच अप्रैल यानी शनिवार को पड़ गया। आज न्यायालय आने पर बैक डेट में सभी फाइलें खारिज मिली, यह देख अधिवक्ता भड़क गए। उनका कहना था कि जब न्यायालय खाली था तथा उक्त मामले में जनरल डेट पड़ गई तो बीच में फ़ाइलें कैसे खारिज हो गई । इससेआक्रोशितअधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए आर-पार की लड़ाई लड़ने की घोषणा कर दी।

उधर, अधिवक्ता बसन्त पांडेय, रामप्रकाश सिंह, देवेन्द्र मिश्र, चंद्रशेखर यादव, अरुण श्रीवास्तव, अजय सिंह, रमेश सिंह, कृष्णानन्द सिंह आदि अधिवक्ताओं का आरोप है कि वर्ष 2023 में भी एसडीएम व तहसीलदार न्यायालय से 88 पत्रावलियां गायब कर दी गई थी। सैकड़ों मुकदमों की पत्रावलियों को बिना सुने खारिज कर दिया गया था। गायब फ़ाइलों के लिए तहसीलदार के पेशकार ओमप्रकाश पटेल पर तत्कालीन तहसीलदार सुदर्शन कुमार द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मनमानी की आदत हो गई है। इस सम्बंध में उपजिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि अधिवक्ता क्यों नारेबाजी कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी नहीं है। जो भी गतिरोध पैदा हुआ है, उसे अधिवक्ताओं से बातचीत कर सुलझा लिया जाएगा।

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