डां.अम्बेडकर ने सर्वसमाज के लिए किया संघर्ष- जन अधिकार पार्टी


डा. दिनेश कुमार मौर्य की रिपोर्ट
जौनपुर। जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूसिंह कुशवाहा के निर्देशन में संविधान निर्माता भारत रत्न से सम्मानित डॉ भीमराव अम्बेडकर जयंती विधानसभा मुंगराबादशाहपुर के सराय रैचन्दा में पार्टी कार्यालय पर धूमधाम से मानया गया। जिसमें मुख्य अतिथि युवा प्रदेश अध्यक्ष पंकज मनु विश्वकर्मा रहे। वक्ता के रुप में चुनाव प्रभारी व राष्ट्रीय संगठन मंत्री पटेल विजय नारायण वर्मा,कौशाम्बी जिलाध्यक्ष इन्द्राज कुशवाहा, प्रतापगढ़ जिलाध्यक्ष राजेश मौर्य, प्रयागराज मण्डल प्रभारी विजय सिंह कुशवाहा रहे। मुख्य अतिथि ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक डाक्टर साहब के सिद्धांत भारतीय राजनीति के लिए हमेशा से प्रासंगिक रहे हैं। दरअसल वे एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के हिमायती थे, जिसमें राज्य सभी को समान राजनीतिक अवसर दे तथा धर्म, जाति, रंग तथा लिंग आदि के आधार पर भेदभाव न किया जाए। उनका यह राजनीतिक विचार व्यक्ति और समाज के परस्पर संबंधों पर बल देता है। उनका यह दृढ़ विश्वास था कि जब तक आर्थिक और सामाजिक विषमता समाप्त नहीं होगी, तब तक जनतंत्र अपने वास्तविक स्वरूप को ग्रहण नहीं कर सकेगी। दरअसल सामाजिक चेतना के अभाव में जनतंत्र आत्मविहीन हो जाता है। ऐसे में जब तक सामाजिक जनतंत्र स्थापित नहीं होता है, तब तक सामाजिक चेतना का विकास भी संभव नहीं होता है।
चुनाव प्रभारी व राष्ट्रीय संगठन मंत्री पटेल विजय नारायण वर्मा ने कहा कि डॉ.अम्बेडकर जनतंत्र को एक जीवन पद्धति के रूप में भी स्वीकार करते हैं, वे व्यक्ति की श्रेष्ठता पर बल देते हुए सत्ता के परिवर्तन को साधन मानते हैं। उनका विचार था कि कुछ संवैधानिक अधिकार देने मात्र से जनतंत्र की नींव पक्की नहीं होती। उनकी जनतांत्रिक व्यवस्था की कल्पना में ‘नैतिकता’ और ‘सामाजिकता’ दो प्रमुख मूल्य रहे हैं जिनकी प्रासंगिकता वर्तमान समय में बढ़ जाती है। दर असल आज राजनीति में खींचा-तानी इतनी अधिक बढ़ गई है कि राजनैतिक नैतिकता के मूल्य गायब हो गए हैं। हर राजनीतिक दल वोट बैंक को अपनी तरफ करने के लिए राजनीतिक नैतिकता एवं सामाजिकता की दुहाई देते हैंl लेकिन सत्ता प्राप्ति के पश्चात इन सिद्धांतों को अमल में नहीं लाते हैं। वहीं कौशाम्बी जिलाध्यक्ष इंद्राज कुशवाहा ने कहा कि डॉ. अम्बेडकर समानता को लेकर काफी प्रतिबद्ध थे। उनका मानना था कि समानता का अधिकार धर्म और जाति से ऊपर होना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी समाज की प्रथम और अंतिम नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। अगर समाज इस दायित्व का निर्वहन नहीं कर सके तो उसे बदल देना चाहिए। वे मानते थे कि समाज में यह बदलाव सहज नहीं होता है, इसके लिए कई पद्धतियों को अपनाना पड़ता है। आज जब विश्व एक तरफ आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ विश्व में असमानता की घटनाएँ भी देखने को मिल रही हैं। इसमें कोई दो राय नही है कि असमानता प्राकृतिक है, जिसके चलते व्यक्ति रंग, रूप, लम्बाई तथा बुद्धिमता आदि में एक-दूसरे से भिन्न होता है। लेकिन समस्या मानव द्वारा बनायी गई असमानता से है, जिसके तहत एक वर्ग, रंग व जाति का व्यक्ति अपने आप को अन्य से श्रेष्ठ समझ संसाधनों पर अपना अधिकार जमाता है। जो आज भी समाज में व्याप्त असमानता को प्रकट करता है। भारत में इस स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 14 से 18 में समानता का अधिकार का प्रावधान करते हुए समान अवसरों की बात कही गई है। यह समानता सभी को समान अवसर उपलब्ध करा सकें, इसके लिए शोषित, दबे-कुचलों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया। इस प्रकार अम्बेडकर के समानता के विचार न सिर्फ उन्हें भारत के में, बल्कि विश्व के संदर्भ में भी प्रासंगिक बनाते हैंl प्रतापगढ़ जिलाध्यक्ष राजेश मौर्य ने कहा बाबा साहब ने सर्वसमाज के लिए संघर्ष किया उन्होंने किसी के साथ कोई भेदभाव नही किया।यह वह दौर था जब छुआछूत अपने चरम पर थी ।उन्होंने कठिन परिश्रम शिक्षा ग्रहण की और आजाद भारत का संविधान लिखा हमे उनसे प्रेणा लेना चाहिए और उनके बताये हुए मार्ग पर चलकर ही आप सब आगे बढ़ सकते है। उन्होंने आयोजको को बधाई देते हुए कहा ऐसे आयोजनों से समाज मे चेतना आती है ।उन्होंने आगे कहा शिक्षा शेरनी का दूध है इसे जो पियेगा वही दहाड़ेगा।इस लिए आप सभी अपने बच्चों को शिक्षित करने का काम करे।जयंती में प्रतापगढ़ जिला उपाध्यक्ष गोविन्द मौर्य,
अरविंद कुमार कुशवाहा, सुभाष कुशवाहा,अशोक पाल, श्रीराम सरोज, राजेन्द्र विश्वकर्मा ,राज कुमार,जयन्ती प्रसाद, श्री प्रकाश मौर्य, मुन्नीलाल, लक्ष्मी कान्त,आलोक,अनूप,अम्बुजा कुमार, उमाशंकर, राकेश मौर्य, रमेश चन्द्र,राहुल कुमार, आशीष,शिवबली कुशवाहा ,भानु प्रताप,ओम प्रकाश, विकास कुमार मौर्य, राहुल कुशवाहा, राजकुमार मौर्य,सत्यप्रकाश मौर्य आदि मौजूद रहे।
