जौनपुर का नाम दुनिया के कोने कोने तक पहुंचे यही मकसद : अब्दुल्ला तिवारी
विदेश में रहकर भी जौनपुर को पर्यटन स्थल का दर्जा दिलाने के लिए निरंतर संघर्षरत्

जौनपुर। जनपद में गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखने के उद्देश्य से जौनपुर के अप्रतिम उदाहरण अब्दुल्ला ने वर्ष 2012 में अपना नाम अब्दुल्ला से बदलकर अब्दुल्ला तिवारी रख लिया। जिसके बाद से वह फेसबुक पर ट्रेंड करने लगे इन दिनों अब्दुल्ला तिवारी अपना जौनपुर नाम से लगभग तीन लाख सदस्यों का फेसबुक ग्रुप चला रहे हैं जिसके माध्यम से वह जौनपुर की खुशबू को पूरे विश्व में महकाने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जब भी वह जौनपुर आते हैं तो जिले को पर्यटन स्थल बनाने के लिए समाजसेवी संगठनों व जनप्रतिनिधियों से संपर्क करते रहते हैं, वर्ष 2018 में भी उन्होंने कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को भी इस मामले में पत्रक सौंपा था लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है ।
फिलहाल वह सोशल मीडिया के द्वारा समाजसेवी संगठनों व जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रदेश सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि जौनपुर को पर्यटन स्थल घोषित किया जाए यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं मौजूद हैं जिससे जिले का नाम दुनिया के कोने-कोने में पहुंचे।
जौनपुर में सोशल मीडिया बादशाह खिताब से नवाजे जाने वाले अब्दुल्ला तिवारी जनपद जौनपुर के तहसील शाहगंज थाना खेतासराय गांव गयासपुर नोनारी के निवासी हैं। और वर्तमान दुबई में फोर व्हीलर कंपनी शोरूम में कार्यरत हैं।
जौनपुर का ऐतिहासिक वर्णन करते हुए अब्दुल्ला तिवारी जी कहते हैं कि जौनपुर पूरी दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है माधोपट्टी नामक एक गांव से लगभग 4 दर्जन आईएएस,आईपीएस,पीसीएस रैंक के अधिकारी देश भर में अपना योगदान दे रहे हैं देश की सुरक्षा व्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में कार्यरत होकर मजबूती से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और दूसरी बड़ी बात यह है कि जौनपुर में आज तक कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ जौनपुर वासियों ने सांप्रदायिक शक्तियों को कभी पनपने नहीं दिया 1399 से लेकर 1505 तक जौनपुर जिला व शहर उत्तर भारत की राजधानी रहा है इसकी एक सरहद उड़ीसा एक नेपाल और एक दिल्ली लगती थी।
कभी शर्की सल्तनत की राजधानी रहा शिराज़े हिन्द के खिताब से नवाजा गया जौनपुर मेरे दिल में बसता है अब्दुल्ला तिवारी वर्तमान समय में जौनपुर को सियासत की नजर लग गई है इस वजह से आज तक जौनपुर को पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिल सका जबकि जौनपुर में ऐसी-ऐसी ऐतिहासिक धरोहर हैं कि यहां पर्यटकों को केंद्रित करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
