झंडा गीत के रचयिता पद्यम श्री श्याम लाल गुप्त पार्षद को दी गई श्रद्धांजलि
फतेहपुर। अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद द्वारा कैंप कार्यालय पीलू तले चैराहे पर लाक डाउन व सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुये झंडा गीत के रचयिता पद्यम श्री श्याम लाल गुप्त पार्षद का 43वां निर्वाण दिवस मनाया गया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुये उनको नमन करते हुये उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये दोसर वैश्य कल्याण समिति के जिलाध्यक्ष विमल गुप्त एडवोकेट ने पार्षद जी के तैलीय चित्र पर माल्यार्पण करते हुये उनको नमन करते हुये कहा कि पार्षद जी ने देश की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। कानपुर जनपद के नरवल ग्राम में एक सामान्य परिवार में जन्मे पार्षद जी ने प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण करते हुये फतेहपुर जनपद को कार्य क्षेत्र बनाकर यहीं से आजादी का बिगुल फूंका और जीवन पर्यतं राष्ट्र की सेवा मे ंअपने को समर्पित कर दिया। मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय वैश्य एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव विनोद कुमार गुप्त ने कहा कि नौ सितंबर 1896 में जन्मे पार्षद जी ने विशारद की शिक्षा प्राप्त करने के शिक्षक की नौकरी की लेकिन राष्ट्रीय आंदोलन का जज्बा होने के कारण शिक्षक की नौकरी को त्याग कर कांग्रेस की सदस्यता ली तथा स्वतंत्रता आंदोलन में कार्य करना प्रारंभ किया। 19 वर्षों तक कांग्रेस कमेटी

के लगातार अध्यक्ष रहे। अनेक जेल यात्रायें की। दस वर्ष फरारी में रहते हुये स्वतंत्रता आंदोलन में कार्य किया। हम सभी आज उन्हे नमन करते है। परिषद के युवा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र शरन सिंपल ने कहा कि उन्होंने हजारी लाल फाटक में रहकर विजयी विश्व तिरंगा प्याारा झंडा उंचा रहे हमारा झंडा गीत की रचना की। फिरंगियों को जानकारी हुई तो पार्षद जी को बंदी बनाकर बैरक नंबर नौ में निरूद्व कर दिया। शेष झंडा गीत को स्थानीय कारागार में ही पूर्ण किया। 1934 में हरिपुर कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया। 15 अगस्त 1952 को लाल किला दिल्ली से स्वयं झंडा गीत का गायन किया। दस अगस्त 1977 को आपका महाप्रयाण हो गया। इस मौक पर नरेंद्र गुप्त, संजय गुप्त, आशीष अग्रहरि, अमित गुप्त, वेद प्रकाश गुप्त, राधेश्याम हयारण, राम स्वरूप गुप्त आदि रहें।
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