लाभार्थी को मालूम नही, कागज मे आवास बन गया
मुंगरा बादशाहपुर जौनपुर । भारतीय सहारा समाचार की टीम द्वारा गांव गांव के अंदर जाकर समाचार के माध्यम से ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी की मिलीभगत से भ्रष्टाचार के खेल को दिखाने का कार्य लगातार किया जा रहा है । भारतीय सहारा की एक ही मुहिम है कि सरकार द्वारा भेजी जा रही योजना गांव- गांव तक पहुंचे । इसीलिए भारतीय सहारा की टीम गांव – गांव तक जाकर सरकार की योजनाओं का हकीकत सामने लाने का कार्य किया जा रहा है । उसी क्रम में पीड़ित की शिकायत पर जब भारतीय सहारा की टीम मुंगरा बादशाहपुर विकासखंड के अंतर्गत ग्राम रामनगर में पहुंची तो पीड़ित मुन्नी लाल पुत्र सुक्खू माली ने बताया कि उसका प्रधानमंत्री योजना के अंतर्गत आवास मिला था, ग्राम प्रधान भारतीय मौर्य के पति नन्हे मौर्या मुन्नीलाल से ₹20000 की डिमांड किया जब मुन्नीलाल ₹20000 नहीं दिया तब ग्राम प्रधान भारतीय मौर्या और उनके पति नन्हे मौर्या मुन्नीलाल से आवास की चर्चा करना बंद कर दिया और पूछने पर कहने लगे अभी आपका आवास नहीं आया है जबकि पीड़ित मुन्नी लाल का कहना है कि इंटरनेट पर उन्होंने जांच की जिसमें उनके नाम से ₹120000 रुपए का आवास कागज में बन भी गया है और लाभार्थी को मिल भी गया है । इस संबंध मे जब भारतीय सहारा की टीम मुन्नीलाल के द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि करना चाहा तो टीम मुंगरा बादशाहपुर विकास खंड कार्यालय पर पहुंचकर रामनगर ग्राम का वर्ष 2017 का रिकॉर्ड निकलवाकर देखा तो , रिकॉर्ड के अनुसार रिजल्ट मिला की पीड़ित द्वारा लगाया गया आरोप बिल्कुल सत्य है जिसमें पीड़ित का नाम सन ऑफ और माता का नाम सब कुछ मैच किया हुआ है और उसके नाम से 120000 रुपए का गमन भी हुआ है, जब इसकी जानकारी पुनः ग्राम प्रधान भारतीय मौर्य के पास समाचार की टीम पहुंची तो वहां की ग्राम प्रधान भारतीय मौर्य ने बताया कि इसकी जानकारी उन्हें कुछ भी नहीं है यह जानकारी यदि आपको चाहिए तो हमारे सेक्रेटरी साहब से बात कर लीजिए । जब साल 2017 मे उस गांव में कार्यरत रहे सेक्रेट्री से बात किया गया है तो सेक्रेटरी ने बताया कि अब उनका वहां से ट्रांसफर हो गया है उस गांव से अब हमारी जिम्मेदारी नहीं है, अब सवाल यह उठता है कि जब आवास का पैसा सीधे लाभार्थी के खाते में जाता है तब इतना बड़ा खेल कैसे हो गया । इससे इस बात की पुष्टि होती है कि सरकार भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए डाल डाल चलती है तो भ्रष्टाचार के खिलाड़ी पात पात चलते हैं । यह भ्रष्टाचार का खेल किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं, किंतु उच्च अधिकारी जिम्मेदारी से मामले की जांच कर ले तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा ।
