मनवांछित फल प्राप्ति के लिए नवरात्रि में देवी मां की आराधना एवं विधि
इस बार नवरात्रि 10 अक्टूबर, 2018 से आरम्भ हो रही हैं और जिसमे 18 अक्टूबर को ‘अंतिम नवरात्रा’ है। नवरात्रि व्रत में भक्त देवी के विभिन्न स्वरुपों की पूजा करते है। भगवती के कठिन उपवास करके हर भक्त की इच्छा होती है कि मां उसकी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करें।
कई बार सही विधि पता नहीं होने की वजह से भी ‘मां भवानी’ की पूजा में कमी रह जाती है, जिसके फलस्वरुप भक्तों को मनवांछित फल नहीं मिल पाता है।
इस क्रम में दुर्गा मां की आराधना के कुछ ऐसे मंत्र, जो खासतौर पर विशेष प्रकार

की इच्छाओं की पूर्ति के लिए है । अपने इच्छित फल के अनुसार मंत्र को चुनकर ‘मां भगवती’ के सामने नवरात्रि में संकल्प कर के अपनी मनोकामना अर्ज करे और नियम के अनुसार प्रतिदिन मंत्र का जप करें।
माला जाप की विधि :
स्नानादि कर पवित्र हो देवी की प्रतिमा के पास दीपक जलाएं। मंत्र जाप करने का संकल्प कर भगवती को अपनी मनोकामना बताकर जाप करें। जाप करते समय अन्य कोई कार्य न करें।
अपना ध्यान केवल माता देवी के स्वरूप की ओर ही केन्द्रित रखें। जप करते वक़्त बातें न करें। ध्यान रहे कि जिस मंत्र को जितनी बार जपने का नियम नवरात्रि के पहले दिन से करेंगे, उतनी ही संख्या में उस मंत्र को प्रतिदिन करें। जैसे अगर 2 माला प्रतिदिन करने का नियम है.. तो रोज 2 ही माला करें..!! हैं।
“कब होगी महाअष्टमी, नवमी पूजा और दशहरा”
– महाष्टमी व्रत- बुधवार 17 अक्टूबर 2018.
– महानवमी व्रत- गुरुवार 18 अक्टूबर 2018.
– विजयादशमी (दशहरा), नवरात्रिव्रतपारण- शुक्रवार 19 अक्टूबर 2018.
10 अक्टूबर, प्रतिपदा – बैठकी या नवरात्रि का पहला दिन- घट/ कलश स्थापना – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी पूजा
11 अक्टूबर, द्वितीया – नवरात्रि 2 दिन तृतीय- चंद्रघंटा पूजा
12 अक्टूबर, तृतीया – नवरात्रि का तीसरा दिन- कुष्मांडा पूजा
13 अक्टूबर, चतुर्थी – नवरात्रि का चौथा दिन- स्कंदमाता पूजा
14 अक्टूबर, पंचमी – नवरात्रि का 5वां दिन- सरस्वती पूजा
15 अक्टूबर, षष्ठी – नवरात्रि का छठा दिन- कात्यायनी पूजा
16 अक्टूबर, सप्तमी – नवरात्रि का सातवां दिन- कालरात्रि, सरस्वती पूजा
17 अक्टूबर, अष्टमी – नवरात्रि का आठवां दिन-महागौरी, दुर्गा अष्टमी ,नवमी पूजन
18 अक्टूबर, नवमी – नवरात्रि का नौवां दिन- नवमी हवन, नवरात्रि पारण
19 अक्टूबर, दशमी – दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी..!!
अगर आप घर में कलश स्थापना करना चाहते हैं.. तो सबसे पहले उस जगह को पवित्र कर लें, एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और अब एक कलश पर स्वास्तिक बनाएं। फिर कलश पर कलावा बांधे और उसमें जल भरें। कलश में साबुत सुपारी, फूल, इत्र, पंचरत्न, अक्षत और सिक्का डालें।
“कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त” :
भक्त 10 अक्टूबर को सुबह 7:56 बजे तक नवरात्रि का कलश स्थापित कर सकते हैं। कलश स्थापना के लिए यह शुभ मुहूर्त है। यदि आप किसी वजह से इस समय कलश स्थापित नहीं कर पाते हैं तो इसी दिन सुबह 11:36 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में भी कलश की स्थापना कर सकते हैं।
“नवरात्रि की अखंड जोत” :
जिन भक्तो के घरों में नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योत जलाई जाती है, उनमें मां की विशेष कृपा होती है, लेकिन इसके लिए नियमों का पूरा पालन करना होता है।
अखंड दीप जलाने वाले व्यक्ति को जमीन पर ही सोना चाहिए। ज्योत को बुझने नहीं देना चाहिए। इस दौरान घर में सफाई रखनी चाहिए।
पूजा के वक्त किसी के बारे में मन में बुरे विचार नहीं लाने चाहिए और सच्चे मन से मां का ध्यान (उपासना) करनी चाहिए..!!
नवरात्रि 10 अक्टूबर, 2018 से शुरू हो रही है। इस बार “शारदीय नवरात्रि” में कई सालों बाद *’शुभ संयोग’* बन रहे हैं। ग्रह-नक्षत्रों के ये संयोग बहुत खास रहेंगे। इस साल भी तिथि क्षय नहीं होने से.. नवरात्रि पूरे 9 दिन की रहेगी। इस बार मां दुर्गा बुधवार को ‘नाव पर सवार’ होकर आ रही हैं। ‘नौकावाहन पर माता’ के आने से सर्वसिद्धि प्राप्ति होती है। पूरे 9 दिनों की नवरात्रि होना देश में खुशहाली का संकेत है।
ये लगातार दूसरा साल है.. जब शारदीय नवरात्रि 9 दिनों की है।
वैसे वर्ष 2019 में भी ऐसा ही रहेगा।
“ये शुभ संयोग बन रहे हैं” :
इस बार नौ दिनों की नवरात्रि में दो गुरुवार आएंगे और यह अत्यंत ही शुभ संयोग है, क्योंकि गुरुवार को दुर्गा पूजा का कई गुना शुभ फल मिलता है। ग्रहों की स्थिति देखी जाए तो शुक्र का स्वगृही होना शुभ फल देगा। वहीं इस बार नवरात्रि में राजयोग, द्विपुष्कर योग, अमृत योग के साथ सर्वार्थसिद्धि और सिद्धियोग का संयोग भी बन रहा है। इन विशेष योगों में की गई पूजा-पाठ और खरीदारी अत्यधिक शुभ और फलदायी रहेगी। इसलिए नवरात्रि में पूजा-पाठ के साथ मांगलिक कार्यों के लिए खरीदारी करना भी शुभ माना जाएगा। इस नवरात्रि में लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए सोने-चांदी के आभूषण, कपड़े और वाहन की खरीदारी करना शुभ रहेगी।
चित्रा वैधृति योग निषेध सति संभवे पालनीयो।
ननु निषेधानुरोधेन पूर्वाह्न:प्रारम्भकाल: प्रतिपत्तिथिर्वाsतिक्रमणीय:।।
