मधुमेह लाइलाज बीमारी नही है-योगेश देव पाण्डेय
दिल्ली । अब इसी विषय पर तेजी से काम चल रहा है जब कि हम संसाधन सम्पन्न नही थे तब वैज्ञानिकों ने शोध किया इन्सुलिन जैसे हार्मोन्स को वैकल्पिक व्यवस्था दी, अब आयुर्वेद का स्वर्णिम समय धीरे धीरे आ रहा है । आयुर्वेद ,प्राकृतिक चिकित्सा, वनौषधियों ,योग व्यायाम आदि पर विशेष रूप से शोध हो ,जिसमें आयुर्वेद को प्रथम वरीयता दिया जाय कारण कि असाध्य बीमारियों का निदान व चिकित्सा आयुर्वेद में विद्यमान है जैसे गाँव का गरीब ऐसे प्राकृतिक वातावरण में

रह रहा होता है कि स्वतः आयुर्वेद नियमों का लगभग लगभग पालन होता रहता है ,अभाव में गाँव का गरीब प्रारम्भ से ”साँवाँ – कोंदव ”का चावल खाता था जो कि अब आज लोगों को पता चला कि शुगर फ्री चावल है, यह एक उदाहरण हैं बच्चे जितना भोजन करते हैं उतनी ऊर्जा व्यय कर देते हैं उनके स्वास्थ्य होने का कारण भी यही है। इस तरह से अनेक चमत्कृत उदाहरण हैं जो कि हमे प्रकृति को ओर पुनः जाने पर विवश कर रहे हैं, ४० वर्ष से कम उम्र के लोगों का मधुमेह कुछ जल्दी नियंत्रित हो सकता है ,यह निश्चय है कि मधुमेह लाइलाज बीमारी नही है यह कोई बीमारी भी नही है मात्र अग्नाशय ग्रन्थि की अनियमितता है अग्नाशय ग्रन्थि की अनियमितता या न काम करने के कारण जो भी लक्षण शरीर मे होनें लगते हैं वह सभी लक्षण धीरे- धीरे असाध्य रोगों में अवश्य परिवर्तित हो जाते हैं, आज विषय विचारणीय है कि अग्नाशय कैसे नियंत्रित रूप से कार्य करे व जाग्रतावस्था में हो ?
यह सभी आयुर्वेद स्वाथ्य पद्धती योग, व्यायाम,प्राकृतिक चिकित्सा आदि से ही सम्भव है, आज का व्यस्त मानव अपने शरीर के लिए प्रातः सायं कुछ समय व्यतीत करे धन का लोभ छोड़े कारण की पूरा जीवन धन कमाने में व्यतीत करता है और पूरा धन रोगों को ठीक करने में व्यय करके असहाय अवस्था में हो जाता है इसलिए आयुर्वेद ग्रंथों में बताए स्वाथ्य दिनचर्या, रात्रिचर्या का पालन मनुष्य करेगा ऋतुवों के अनुसार रहन -सहन ,खान- पान का सम्यक पालन करेगा व आज के इस आधुनिकता की चकाचौध में व्यस्त जीवन में प्रदूषित वातावरण से अपने को सदैव बचाये , अपना भार भी शरीर का नियंत्रित करे तो निश्चित रूप से सफलता आपके हाँथ में होगी मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है ऐसा अभ्यास अपनें जीवन मे दिनचर्या में सम्मिलित करें तो सदैव के लिए मधुमेह गाँव ही नही ,नगर ही नही ,पूरे विश्व से मधुमेह समाप्त किया जा सकता है जब कि आज वृहद प्रकार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मधुमेह व अन्य असाध्य रोगों पर शोध चल रहा है जिसका आधार ” आयुर्वेद” ” है।
धन्यवाद
आपका शुभेक्षु
योगेश देव पाण्डेय
परमाध्यक्ष
आयुर्वेद वनौषधि परामर्श
आयुर्वेद वनौषधि प्र0(ल0उ0)मंत्रालय भारत सरकार
नाड़ी एवं वनौषधियोग ज्योतिष चिकित्सा विशेषज्ञ
ज्योतिर्विद एवं वास्तुशास्त्राचार्य
द्वारा-काशी हिन्दू विश्व विद्यालय(वाराणसी)
संपर्क – 09935122152
मिर्जापुर (उ0 प्र0)
