बाहुबली कंस्ट्रक्शन की बड़ी मनमानी उजागर रात के अँधेरे में खोदी किसान,और वन विभाग की जमीन
धूमा (सिवनी)। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स में मध्य प्रदेश कई मामलों में या तो पहले पायदान पर आ रहा है या दूसरे-तीसरे। अफसोस ये कि इनमें से अधिकांश मसले सकारात्मक नहीं हैं। अब सामने आया है कि अवैध खनन के मामलों में भी मध्य प्रदेश अव्वल पांच राज्यों में शामिल है। सन् 2015-16 में प्रदेश में अवैध उत्खनन के 13 हजार 627 मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े भी वे हैं जो दर्ज हो गए, वरना अवैध उत्खनन तो रात के अंधेरे या दिन के सन्नाटे में चलने वाली ऐसी प्रक्रिया है जो सरकारी रजिस्टरों में कम ही दर्ज हो पाती है।
मध्यप्रदेश भौगोलिक रूप से देश के उस हिस्से में है जो खनिज से भरपूर है। मगर सख्त निगरानी के अभाव, प्रशासन की मिलीभगत, ठेकेदारों की धौंस और करोड़ों की कमाई के लालच के चक्कर में यहां की खनिज संपदा लूटी-खसोटी जा रही है। चाहे जबलपुर, कटनी बेल्ट की मार्बल खदानें हों या अन्य इलाकों की चूना, कोयला, पत्थर, रेत,मुरम,बोल्डर या भवन निर्माण से जुड़े महंगे खनिजों, धातुओं की खदानें, इनमें अवैधउत्खनन का प्रतिशत पट्टे में तय खनन से अधिक ही होता है। ठेकेदार, बड़ी कंपनियां, स्थानीय प्रशासन और शासन में शामिल कुछ लोलुप लोग मिलकर खनन नीति के नियम-कायदों को खदान में ही दफन कर देते हैं और मनमाने ढंग से कानून का मजाक उड़ाते हैं। उनका ये गोरखधंधा प्राय: कम ही सामने आ पाता है क्योंकि खदानें जनता, मीडिया सहित अन्य तंत्रों की नजर से दूर निर्जन इलाकों में होती हैं और वहां क्या हो रहा है, ये कभी जनता के बीच नहीं आ पाता। जिन पर इनकी निगरानी का जिम्मा है, वे खुद ठेकेदारों या कंपनियों से नजराना लिए होते हैं। ऐसे में कागजी ओके रिपोर्ट्स बनती रहती हैं और ठेकेदारों की हैवी मशीनरी धरती की छाती में बड़े-बड़े गड्ढे करती रहती हैं। इस अंधाधुंध खुदाई का असर पर्यावरण पर तो पड़ता ही है, स्थानीय निवासियों का जनजीवन और पारिस्थितिकी तंत्र भी बुरी तरह प्रभावित होता है।
मगर ऐसा नहीं कि इस स्थिति से निपटा नहीं जा सकता। सरकार को शीर्ष स्तर पर खनन संबंधी नीतियों में कुछ जरूरी और सख्त बदलाव करने होंगे। राज्य की खदानों के लिए आए आवेदनों, लीजों की स्वीकृतियों, अनुबंधों के निष्पादन के साथ-साथ शर्तों के पालन पर कड़ी नजर रखने का तंत्र बनाना होगा। जिसने भी निर्धारित सीमा से अधिक खनन किया हो, उस पर भारी दंड आरोपित किया जाए और उसे सख्ती से वसूला भी जाए। लीज समाप्त हो तो उसका तुरंत नवीनीकरण करने के बजाय फिर से बोलियां मंगवाई जाएं। यदि सरकार ये सब ईमानदारी से करवा ले तो उसके राजस्व में तो अभूतपूर्व वृद्धि होगी ही, अवैध उत्खनन के मामले भी कम हो जाएंगे। सरकार को ये समझना होगा कि नकारात्मक मामलों में प्रदेश का अव्वल आना अच्छी बात नहीं है।
एक ओर शासन किसानों के हित में नित नई योजनाये उपलब्ध् करा रही है जिसमे सड़क पानी बिजली आदि समस्याओं को दूर करने के प्रयास किये जा रहे है ताकि प्रदेश का अन्नदाता दुखी न रह सके वही दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त कर जिले सहित नगर में तेज़ गति से चल रहे फोरलेन निर्माण के कार्य में एल एन टी कंपनी के काम में लगे बाहुबली कन्स्ट्रक्शन द्वारा मनमानी और दबंगई से नगर और आसपास बेखोफ होकर खेतिहर किसान की भूमि और वन विभाग की भूमि पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है जिसमे किसानों के खेतों को निशाना बनाकर भूमि स्वामी की अनुमति एवम जानकारी के बिना रात के अंधेरे में 5 से 10 फिट गहरी खाई बनाकर उत्खनन किया जा रहा है।। ताजे घटनाक्रम में धूमा के संतनगर निवासी कृषक प्रेमलाल बल्द श्यामलाल एवम नारू बल्द दीपचंद ने बताया कि एल एन टी कंपनी में लगे बाहुबली कन्स्ट्रक्शन द्वारा फोरलेन निर्माण कार्य के अर्थवर्क मे कृषि भूमि प.ह.नं.24 खसरा नम्बर 182 रकबा 1.14 मद बड़े झाड़ का जंगल 200×66×3(लम्बाई×चौड़ाई× गहराई) खसरा 184में रकबा2.05 घास मद में 50×40×2(लम्बाई×चौड़ाई×गहराई)स्थित है वही कृषक प्रेमलाल की खसरा नम्बर 183/3 में 2.60 लगभग6 एकड़ जमीन को खोदकर खाई बना दिया गया है।जिसमे बाहुबली कंस्ट्रक्शन द्वारा किसानों की निजी भूमि को रात के अँधेरे में खोद दिया गया है जिसकी लिखित शिकायत मेरे द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लखनादौन,तहसीलदार लखनादौन, आर.आई.राजस्व मंडल धूमा, एवम थाना प्रभारी धूमा को की गयी थी।
वैन भूमि को भी किया छलनी-: बाहुबली कन्स्ट्रक्शन द्वारा पिछले एक पखवाड़े पूर्व शासकीय वन भूमि पर कुल 102.375 गहन मीटर पर अवैध उत्खनन ककया गया जिसमें 13 घन मीटर मिट्टी एवम 88 घन मीटर में रात के अंधेरे में उत्खनन किया गया जो कि वन परिक्षेत्र धूमा अंतर्गत पूर्व घोघरी बीट मुनारा क्र.11 कक्ष क्र. पीएफ 67 से अवैध उत्खनन करते हुए एक पोक लेंड मशीन जप्त की गई जिसपर भारतीय वन अधिनियम की धारा 33(1)ग के तहत अवैध उत्खनन का मामला पंजीबद्घ किया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ की चर्चा-:नगर में जनचर्चा है कि अवैध उत्खनन की शिकायत के 12 दिवस बाद भी जिला खनिज विभाग के उच्चाधिकारियों के कान में जूं न रेंगना भी इस ओर संकेत करता है कि जिले के खनिज विभाग में भी इन उत्खनन कर्ताओं की अच्छीखासी पकड़ है तभी तो क्षेत्र के दर्जनों उत्खनन के प्रकरण विभाग में लंबित हैं और कोई कार्यवाही नही हो रही जिससे इन उत्खनन कर्ताओं के हौसले बुलंद हैं। वही दूसरी ओर वन विभाग की राष्ट्रीय राजमार्ग

से लगी भूमि पर अवैध रूप से किये जा रहे अवैध उत्खनन कर वन भूमि के मुनारा को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया जिसकी भी बीट प्रभारी को खबर तक नही या संरक्षण दिया जो जांच का विषय है।
शिकायतकर्ता प्रेमलाल ने बताया कि मैने विगत मंगलवार को जनसुनवाई में भी कलेक्टर महोदय को भी शिकायत की थी जिस पर कलेक्टर साहब ने माननीय पुलिस अधीक्षक सिवनी को बाहुबली कंस्ट्रक्शन के ठेकेदार के विरुद्ध एफ आई आर दर्ज करने के निर्देश दिए है।
इनका कहना है-:
उक्त प्रकरण में वन भूमि में अवैध उत्खनन करते पोक लेंड मशीन को जप्त कर आगे की कार्यवाही के लिए एस डी ओ महोदय को प्रेषित कर दिया गया है।
सुभाष तिवारी वन परिक्षेत्र अधिकारी धूमा
शासकीय भूमि एवम निजी भूमि में अवैध उत्खनन किया गया है जिसका प्रकरण बनाकर नायाब तहसीलदार के समक्ष प्रस्तुत किया गया
है ।
के.आर.चौकसे
राजस्व निरीक्षक धूमा
