कोर्ट शादी में माता-पिता की अनुमति व मौजूदगी अनिवार्य हो – सुनील वत्स

कृपा शंकर पाण्डेय की रिपोर्ट
दिल्ली । आज समाज में एक भयंकर बीमारी अपने पांव पसार रही है बच्चों का घर से भाग कर शादी करने की बीमारी जो एक सभ्य समाज के लिए बहुत ही भयंकर स्थिति है इस समस्या के समाधान के लिए सभी को आवाज बुलंद एवं जागरूक होने की आवश्यकता है कोर्ट शादी में मां-बाप की सुनिश्चित हो कानून भी बनना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रह सके और सामाजिक समरसता बनी रहे ब्राह्मण समाज अध्यक्ष सुनील वत्स ने कहा माता-पिता का घर कोई धर्मशाला या आश्रम नहीं है कि बच्चे अच्छे परवरिश के साथ बालिग होते ही हर किसी के साथ भागकर शादी करके मां बाप की इज्जत उछाल कर मिट्टी में मिला देते हैं मां बाप अपने जीवन में पूरी कमाई बच्चों की शिक्षा हो कैरियर बनाने में खर्च कर देते हैं और स्वंय फटे पुराने कपड़े पहनते हैं और अच्छा खाना भी नहीं खाते दूध घी नहीं खाते सब कुछ बच्चों के लिए लुटा देते हैं और जब बच्चे बालिग होकर अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं मां बाप को लात मारकर चंद दिनों के प्रेम जाल में फस कर उन्हें धोखा देते हैं मां बाप को रोता बिलखता छोड़कर भाग कर शादी कर लेते हैं बेचारे मां-बाप का तो धन और धर्म सब कुछ लुट जाता है समाज कुटुंब गांव में किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहते ऐसे माता-पिता तनाव का शिकार होकर भयानक बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं और आधी उम्र में तड़प तड़प के मर जाते हैं वोटों की राजनीति करने वाले नेताओं को सोचना चाहिए ऐसे भयावह कृत्य पर अंकुश लगाकर मां-बाप की बिना सहमति के कोई भी शादी को कानूनी मानता नहीं मिलनी चाहिए कोर्ट या किसी संस्था के द्वारा ऐसी शादी होती है तो माता-पिता की मौजूदगी को अनिवार्य किया जाना चाहिए।
