कानून व्यवस्था में नारी सम्मान, योगेश देव पाण्डेय की कलम से ————

भारतीय सहारा न्यूज नेटवर्क:-
मिर्ज़ापुर। आज वर्तमान समय में बालिग युवतियों स्त्रियों के द्वारा व उनके साथ हो रही विभिन्न आपराधिक ज्वलन्त घटनाओं संलिप्तताओ से सभी परिचित हैं।
आज यह कैसी व्यवस्था है कि जब किसी के घर में नंन्ही बिटिया पैदा होती है तो उसका मान सम्मान लाड प्यार और उसको भरपूर परिवार का सुख शिक्षा हर एक उन व्यवस्था जो उसे आवश्यक हो माँ बाप के द्वारा मिलता है। मां-बाप की इज्जत में चार चांद लगता है। वही नन्ही बिटिया बालिग होने तक अपने मां-बाप का हर सुख सुविधा का आत्मीय प्रेम मनोभावों का स्वभावतः उपयोग करती है। नन्ही बच्ची को दूध इलाज खाना-पीना उठना बैठना लाड प्यार दुलार माता-पिता का अपने परिवार के साथ स्वभावतः खूब मिलता ही है। लेकिन आज समाज के विपरीत अब कानून में प्राप्त अधिकारों के अनुसार यह ऐसी कौन सी व्यवस्था है कि बालिग होते ही वह अपने शरीर जी पूर्ण स्वामी बन जाती है और अपनी इक्षा के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति के साथ घर छोड़ कर जा करके माँ बाप के प्रेम प्यार सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा की धज्जियां उड़ाने में सफल हो जाती हैं। इतनी मात्रा में अधिकार क्यों?
किसी भी जाति धर्म वर्ण रंग लिंग के व्यक्ति के साथ जाकर के अपने प्रेम प्रपंच की पूर्ति करती है या इसे महिला का मान सम्मान नारी सम्मान कहें या नारी सशक्तिकरण कहें या महिलाओं का अधिकार कहें या किस परिभाषा में इस बात को समझा जाय ?
जब कि माँ बाप के विरोध में और सामाजिक व्यवस्थाओं के विपरीत में अपने मन की मनमानी पर विशेष बढ़ावा है, जिसे भी आज एक सीमा तक तो समाज द्वारा सहन व स्वीकार किया ही जा रहा है। किंतु सर्वोच्च कानूनी सत्ता का इस प्रकार महिलाओं के सम्मान शसक्तिकरण में यह कैसा बढ़ावा ?
ऐसा नहीं है कि आज जो समस्याएं हैं पहले ऐसी समस्याएं नहीं होती थी इन्हीं समस्याओं को देखते हुए प्राचीन जो व्यवस्थाएं बनाई गई थी जिसे मानवीय गरिमा सम्मान को देखते हुवे समय-समय पर स्वयं परिवर्तन होते रहे हैं, जो प्राचीन समय मे कहीं न कही अति थी। आज इन्हीं सब समस्याओं को देखते हुए कुछ सामाजिक प्रतिष्ठित संस्कारित नियम हैं जो सदैव समाज के लिए व एक माँ बाप के सम्मान में विशेष सहयोगी है किसी भी स्त्री की मर्यादा सामाजिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ सुरक्षित है। क्या यह व्यवस्थाएं भविष्यगत समस्याओं को देखते हुवे ठीक नही हैं?
महिलाओं को सम्मान के साथ-साथ आपसी भेदभाव खत्म करने के साथ-साथ छुवा- छूत प्रेम सौहार्द पूर्ण व्यवहार को बढ़ाने के साथ-साथ क्या यह अधिकार दिया जाना न्याय संगत है की वह अपने शरीर की स्वामिनी है ?
इस प्रकार का अधिकार कानून कैसे दे सकता है कि एक बालिग युवती स्त्री अपने शरीर की पूर्णतया स्वामिनी है ?
जब कि जन्मदाता कोई और है। किसी बालिग युवती की मां बाप जो जन्मदाता / जनक है जो उसका नैसर्गिक स्वामी है बालिक होने के बाद उस माँ बाप का अपनी बिटिया पर कोई अधिकार नहीं रह जाता है, जब कि कानूनी विवादास्पद स्थितियों में अभिभावक प्रतिपाल्य संरक्षण के अंतर्गत सर्व प्रथम नैसर्गिक स्वामी को महत्व मिलता है।
यह कैसी व्यवस्था है बालिग युवतियों के संदर्भ में ? अगर यह व्यवस्था अनवरत लागू रहेगी तो भविष्य में भारतीय संस्कृति पर जो कुठाराघात हो रहा है यह कुठाराघात भारतीय समाज के लिए अभिशाप बनकर के उभरेगा, वर्तमान पीड़ित है।सभी जानते हैं और भी प्रत्यक्ष उदाहरण देखना हो तो इस प्रकार की आए दिन रोज की घटनाओं के आधार पर आंकड़ा निकाला जा सकता है कि एक महिला अपने शरीर की पूर्णतः स्वामिनी है उनको इतनी स्वच्छंदता मिली है बालिग युवतियों महिलाओं को आज उसके परिणाम से समझा जा सकता है वर्तमान में उनका परिणाम भी देखा जाए और जिन्हें संस्कारित रूप से नैतिक दायित्वों के अनुसार माँ बाप ने अपनी बिटिया का विवाह बिटिया की भविष्य के देखते हुवे अपने प्राप्त अधिकारों के अनुसार किया गया है उनका भी परिणाम देखा जाए। इन व्यवस्थाओं में त्रुटियां भी स्वभावतः दोनों तरफ हो सकती है किंतु इतनी बड़ी नही की परिवार के साथ-साथ सामाजिक मर्यादा भी भंग हो, लेकिन दोनों व्यवस्थाओं के अनुसार आज आंकड़े बताते हैं जो सभी जानते हैं और बालिग युवतियों स्त्रियों को अधिकार देने वाली सर्वोच्च सत्ता की व्यवस्था तथा समाज में रहने वाले हर वो माँ बाप हर व्यक्ति आज स्वयं विचार कर सकते हैं कि कौन सा आंकड़ा ठीक है ?
किसके मनोबल को बढ़ावा दिया जाए ? और युवतियों स्त्रियों के लिए क्या ठीक है ?
यदि आज वर्तमान में ऐसी ही घटना किसी बड़े उच्च वर्ग के परिवार के साथ हो रहा है तो यह कितना न्याय संगत होगा कि महिला अपने शरीर की स्वामिनी है इस बात को कितना सहन किया जा सकता है अन्यथा न लिया जाय ?
क्या यह कहते हुवे नजरअंदाज करते हुवे की अरे जाने दीजिए छोड़िए कानून नें अधिकार दे रखा है बालिग युवतियों स्त्रियों को विशेष अधिकार मिला है कि अपने मन की मनमानी कर सकती है। इस बात को इतना बड़ा क्यों कुछ कहा नहीं जा सकता की यह भी किसी आपराधिक श्रेणी में हो सकता है इसलिए और आज कोई माँ बाप बिल्कुल परेशान न रहें। उस व्यक्ति के ऊपर उस मां बाप के ऊपर उस उच्च वर्ग के सामाजिक व्यवस्था उच्च उच्च वर्ग के परिवार के ऊपर क्या बीतेगी, स्वयं विचार करें निम्न परिवार पर बीती तो कोई बात नही ऐसा क्यों ?
इसी प्रकार से यदि कोई माँ बाप अपनी बिटिया के भविष्यगत स्थितियों को ध्याम में रखते हुवे अपना नैतिक दायित्व की पूर्ति करते हुवे संस्कारित हिंदू धर्म शास्त्र संस्कार या अन्य वर्ग अपने-अपने संस्कारों के अनुसार जिस वर-वधू का विवाह संस्कारों द्वारा पूर्ण किया जाता है आज वह ठीक नही है क्या ?
उनमें भी कमियां होती है आपस में दो अंजाने एक साथ मिलते हैं स्वभावतः कमियाँ हो सकती हैं और उन सम्बन्धों में भी आपसी वाद-विवाद मनमुटाव भी स्वाभाविक रूप से होता ही है किंतु कुछ ही समय बाद धैर्य रखने के बाद फिर से उनका जीवन ठीक हो जाता है तथा कुछ समय बाद पूर्ण दाम्पत्य सुखों के साथ व्यस्त जीवन में बदल जाता है। सामाजिक मान प्रतिष्ठा के साथ जीवन चलने लगता है। जिसका प्रत्यक्ष परिणाम भी आज देखा जा रहा है।
आज यह बात सही है कि महिलाओं को भी पुरुषों के तर्ज पर सम्पूर्ण वो अधिकार मिलना चाहिए नारी वर्ग को सम्मान मिलना चाहिए नारी सम्मान शांति सुरक्षा न्याय उनकी आत्म गरिमा सर्वोपरि महत्वपूर्ण होनी चाहिए नारी शिक्षा नारी सम्मान सहानुभूति प्रेम दया करुणा यह सब कुछ जो भी कुछ है जो आवश्यक है और सरकार के द्वारा चलाई गई सभी योजनाएं नारी हित में सर्वोपरि है, किंतु इसका यह बिल्कुल भी तात्पर्य नहीं है कि जैसे ही वह बालिग हो जाए तो अपने शरीर की पूर्णतया स्वामिनी बन जाए माँ-बाप के मान प्रतिष्ठा के साथ एक विशेष कुठाराघात करते हुए आत्मीय भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए आपराधिक गतिविधियों संलिप्तता के साथ समाज में गलत संदेश प्राप्त हो। कानून में मिले प्राप्त अधिकार का इतना बड़ा दुरुपयोग ना हो किस समाज दूषित हो जाए।
आज बालिग युवती स्त्रियों द्वारा व उनके साथ हो रही विभिन्न आपराधिक घटनाओं को देखते हुवे प्राप्त अधिकारों का भविष्य हित में सर्वोच्च सत्ता के लिए विचारणीय है और इन संबधी आपराधिक नियंत्रण किस प्रकार सम्भव है ? जन-हित विशेष विचारणीय है।
लेखक:-
योगेश देव पाण्डेय,मिर्ज़ापुर उ0प्र0
(स्वतंत्र,निष्पक्ष,निर्भीक जन-हित मे समर्पित है)
मो0:-9935122152
