मधुमेह रोगी के लिए मैथी दाना रामबाण – योगेश देव पाण्डेय
प्रोटीन का कम और कार्बोहाइड्रेट का अधिक सेवन करें योग ,व्यायाम के प्रति अभ्यासी हो जाएं
प्रोटीन के लिए दूध, दही, पनीर हरी साग, सब्जी ,सलाद चुकंदर आदि का सेवन करें।
दिल्ली। मधुमेह एक बार होने के बाद जीवन भर रहता है ऐसा नही कहा जा सकता। कारण की यदि आज के समय में प्राचीन आयुर्वेद ग्रंथों में बताए द्वारा स्वास्थ्य नियमों का सम्यक पालन करते हुवे आहार- विहार ,खान- पान, रहन- सहन आज के इस प्रदूषित वातावरण से अपने को बचाते

हुवे शर्करा को नियंत्रित रखे तो इसे सदैव के लिए ठीक किया जा सकता है। ऐसा न करने से ही मधुमेह रोगियों की संख्या वृद्धि के क्रम में है मधुमेह नियंत्रित करने के लिए व मधुमेह रोग पूरे विश्व से समाप्त करने के लिए नियमित दिनचर्या और पोषणयुक्त आहार की आवश्यकता तो होती है व दृढ़ संकल्प की भी आवश्यकता है।
मधुमेह रोग के कारण :-
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मधुमेह होने के कारणों में असंयमित खान -पान, मानसिक तनाव, मोटापा, व्यायाम की कमी, मीठा आहार आदि के कारण इन्सुलिन हार्मोन्स की न्यूनाधिक से मधुमेह रोग होता है जिसकी पुष्टि आयुर्वेद के प्राचीन से प्राचीन ग्रंथ भी करते हैं। आज के वर्तमान समय मे दिन-प्रति दिन मधुमेह रोगियों की संख्या अनवरत बढ़ रही है विदेश ही नही अब भारतवर्ष भी मधुमेह की राजधानी बनती जा रही है। इसे नियंत्रित करने के लिए नियमित आवश्यकतानुसार परीक्षण ,रहन सहन ,खान पान, का होना जितना आवश्यक है उतना ही व्यक्ति अपने सोने ,जागने, भोजन,व दैनिक क्रियाओं का समय लगभग लगभग निर्धारित करते रहने का अभ्यास करते रहना भी अति आवश्यक है
सो कर उठने पर कम से कम ३गिलास पानी पिएं उसके बाद ही दैनिक क्रियाओं में प्रवृत्त हों ।इन्सुलिन हार्मोन के स्राव में कमी से मधुमेह रोग होता है। मधुमेह आनुवांशिक या उम्र बढ़ने पर या मोटापे के कारण या तनाव के कारण हो सकता है। मधुमेह ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति को अधिक से अधिक परहेज से रहना होता है क्रोध से बचे ,कब्ज न हो इस लिए गरिष्ठ खान -पान से बचे और प्रातः इतना व्यायाम हो कि पसीना अवश्य आये। अधिकतर मधुमेह रोगी अपनी दिनचर्या का पालन नही करते हैं जिसके कारण अन्य असाध्य रोगों को भी जन्म देते रहते हैं अधिकतर मधुमेह के रोगीयों को उदर विकार ,कब्ज मानसिक रोग स्मृति नाश,आंखों किडनी ,हृदय रोग, मूत्र रोग ,अनिद्रा नपुंसकता व सुन्नपन की समस्याएं हो जाया करती हैं
मधुमेह रोगी को अपने आहार में कुल ऊर्जा का ४० प्रतिशत कार्बोहाइड्रेटयुक्त पदार्थों से, ४० प्रतिशत वसायुक्त पदार्थों से व २० प्रतिशत प्रोटीनयुक्त पदार्थों से प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि मधुमेह रोगी का वजन अधिक है तो वह अपने भार को भी खान- पान से नियंत्रित रखें तथा भोजन सही समय पर ले,ऐसा न करने पर आधुनिक भाषा में हायपोग्लाइसीमिया की स्थिति हो सकता है। इसके कारण अत्यधिक भूख लगना, पसीना आना,दृष्टि दोष धुंधला या डबल दिखना, हृदयगति तेज होना, झटके आना एवं गंभीर स्थिति होने पर कोमा (अचेतन )भी हो सकता है।
मधुमेह रोगी को सदैव अपने साथ कोई मीठी खाद्य जैसे कोई फल अपनी रुचि अनुसार रखना चाहिए। यदि हायपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिखें जैसा कि ऊपर बताया गया है तो तुरंत इनका सेवन करना चाहिए। एक सामान्य मधुमेह रोगी को ध्यान रखना चाहिए कि वे थोड़ी-थोड़ी देर में आवश्यकतानुसार कुछ न कुछ अवश्य खाते रहें जो कि वसा युक्त न हो एक समय पर बहुत सारा खाना न खाएं।
मधुमेह रोगी सदैव आधा दूध व आधा पानी मिलाकर सेवन करें कम कैलोरीयुक्त खाद्य पेय पदार्थों का सेवन करें जैसे – छिलके वाला भूना चना, परवल, करैला, अंकुरित अनाज, सूप, सलाद आदि का अधिक सेवन करें। दही और छाछ का सेवन करने से शर्करा का स्तर कम होता है और मधुमेह नियंत्रण में सहायक है।
मैथी दाना (दरदरा पिसा हुआ) एक या आधा चम्मच खाना खाने के १५-२०मिनट पहले अधिक समय तक लेने रहने से मधुमेह नियंत्रित रहने लगता है व लाभ भी होता है। रोटी के आटे को बिना चोकर निकाले प्रयोग में लाएं व इसकी गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसमें सोयाबीन मिला सकते हैं।
घी व तेल का सेवन दिनभर में ४ चम्मच से अधिक न करें। सभी सब्जियों को कम से कम तेल का प्रयोग करके पकाना चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियों का ज्यादा सेवन करें।
मधुमेह रोगी को खाने से लगभग १ घंटे पूर्व तेज गति से पैदल चलना चाहिए और साथ ही व्यायाम और योग भी करें। यदि बहोत आवश्यक हो तो सही समय पर इंसुलिन व अपनी औषधियां भी लेते रहें। नियमित रूप से चिकित्सक के पास जाकर परीक्षण तो अवश्य रूप से कराते रहें अपनी जानकारी व परहेज करते रहे।
आयुर्वेद वनौषधि परामर्श
परमाध्यक्ष
योगेश देव पाण्डेय
ज्योतिर्विद एवं वास्तुशास्त्राचार्य
द्वारा-काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (वाराणसी) नाड़ी एवं वनौषधियोग ज्योतिष चिकित्सा विशेषज्ञ
आयुर्वेद वनौषधि प्र0(ल0उ0)मंत्रालय भारत सरकार
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मिर्ज़ापुर
