जौनपुर के राहुल रॉय बने मत्स्य पालन के प्रेरणास्रोत, विभागीय सहयोग और नवाचार से हासिल की उल्लेखनीय सफलता
जौनपुर (सू.वि.)। जनपद जौनपुर के विकास खंड करंजाकला के ग्राम आरा निवासी राहुल रॉय ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। श्री राहुल रॉय ने अपने चाचा जो मत्स्य पालन से जुड़े हैं, के प्रोत्साहन पर मत्स्य पालन के क्षेत्र में कदम रखा। प्रारम्भ में उन्होंने अपने एक छोटे से निजी तालाब से कार्य करना प्रारम्भ किया था, वर्तमान में 108.906 हेक्टेयर के आरा ताल नामक विभागीय जलाशय का ठेका लेकर मत्स्य पालन व उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। श्री राहुल राय को मत्स्य विभाग द्वारा समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहता है। जिसके परिणाम स्वरूप वर्तमान समय में दो उत्पादन चक्र में जहॉ इन्होने मानक के अनुरूप पंगेशियस मत्स्य बीज का संचय कर 05-06 महीनों के दो कल्चर अवधि से वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 1000 कुन्टल पंगेशियस मछली का उत्पादन किया गया है। उन्होने अवगत कराया कि धनराशि रू0 100.00 लाख का विक्रय हुआ।
श्री राहुल रॉय के मत्स्य पालन के कार्य को देखते हुए आस पास के गांव के लोगो को मत्स्य पालन को बढ़ावा मिल रहा है। लोग इनसे काफी प्रभावित भी है इनके द्वारा तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन से 08-10 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। श्री राहुल रॉय द्वारा मत्स्य पालन से वर्ष में दो कल्चर अवधि से 70 से 75 लाख की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है भारत सरकार के किसानों की आय दोगुना करने एवं समावेशी विकास में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।
वर्ष 2024-25 में मत्स्य विभाग द्वारा इनके तालाब का स्थलीय निरीक्षण करते हुए वैज्ञानिक ढ़ग से मत्स्य पालन हेतु प्रोत्साहित किया गया। इनके द्वारा विशेष रूचि दिखायी गयी तथा विभागीय निर्देशन में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र का विस्तार किया गया, और प्रारम्भ में 20 कुन्टल आई0एम0सी0 मत्स्य उत्पादन को बढ़ाकर वर्तमान में इनके द्वारा लगभग हर वर्ष 1400 कुन्टल मछली का उत्पादन किया जा रहा है। जिसमें पंगेशियस, रोहु, भाकुर, मृगल आदि मछलियॉ है।
अवगत कराया गया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 1000 कुन्टल पंगेशियस, 200 कुंतल रूपचंदा, 50 कुन्टल रोहु, और 50 कुन्टल भाकुर एवं 30 कुन्टल मृगल का उत्पादन हुआ है।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में उनकी सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और प्रेरणा का भी स्रोत बनी है। उनके इस कार्य से लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है। आसपास के गांवों के लोग भी उनके कार्य से प्रभावित होकर मत्स्य पालन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस प्रकार श्री राहुल रॉय न केवल अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि श्री राहुल रॉय ने निजी क्षेत्र की लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर अपने गांव में मत्स्य पालन को आजीविका का माध्यम बनाया और यह सिद्ध किया कि यदि वैज्ञानिक पद्धति, विभागीय सहयोग और निरंतर परिश्रम का समन्वय हो, तो मत्स्य पालन अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बन सकता है।

