बांदा में मिलावटखोरी चरम पर: खाद्य सुरक्षा विभाग क्यों रहता है खामोश

विनोद मिश्रा की रिपोर्ट
बांदा। जनपद में खाद्य वस्तुओं में बड़े पैमाने पर मिलावटखोरी अंकुश विहीन हो चुकी है। इस पर अंकुश लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग का कानूनी शिंकजा बेहद कमजोर है। रुचि ही नहीं लेता। व्यापारियों द्वारा फील गुड नें इन्हें धृतराष्ट्र की भूमिका में कर दिया है!
व्यापारी पैसा फेंको तमाशा देखो की तर्ज पर मिलावट खोरी का फायदा जमकर उठा रहे हैं। मिलावट का कारोबार फल-फूल रहा है।
वर्तमान में तो आलम यह है की त्योहारी सीजन आ रहा है। खाद्य वस्तुओं में मिलावट का कारोबार जोर पकड़े है। व्यापारियों ने त्योहार में ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए अभी से गुणा-भाग शुरू कर दिया है। मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए न कोई टीम गठित हुई और न ही कोई फिलहाल योजना बनी है।
बांदा में कानपुर, इटावा, फतेहपुर समेत अन्य जनपदों से नकली खोवा, घी, रिफायंड, सरसो तेल आदि व्यापारी रातोंरात उतार कर जिला मुख्यालय ही नहीं अपितु अतर्रा,नरैनी,बबेरू,पैलानी तहसीलों में भी गोदामों डंप कर रहे है। मिलावटखोरी रोकने के लिए बनाए गए कानून व्यापारियों पर बेअसर हैं। दूध, तेल,घी, क्रीम, पनीर व रिफायंड में मिलावट की सरिता बह रही है।
