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भ्रस्टाचार के मकड़जाल में उलझा उपनिबंधन कार्यालय सदर,फर्जी दस्तावेजो से हो जाते सरकारी जमीनो के बैनामे

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जालसाजों पर एफआईआर के बजाय साठगांठ में जुटे जिम्मेदार

प्रशान्त त्रिपाठी
रायबरेली । सदर तहसील के उप निबंधन कार्यालय में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नही ले पा रहा है। दिन प्रतिदिन भ्रष्टाचार के मामले बढ़ते जा रहे है ,राज्य सरकार की स्वामित्व वाली भूमि का भी बैनामा कोई व्यक्ति कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर कर सकता है । ऐसे ही एक मामले को लेकर राजेंद्र प्रताप ऊर्फ राजन ने जिलाधिकारी रायबरेली को एक शिकायत पत्र भेज कर फर्जीवाड़े का भंडा फोड़ किये जाने की मांग की हैं।
जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में शिकायत कर्ता राजन ने लिखा है
कि उप निबंधक कार्यालय सदर रायबरेली में दिनांक 19 जून 2020 को विक्रेता गोपाल पुत्र मेवा लाल निवासी ई 117 मलिक मऊ कॉलोनी सुल्तानपुर रोड शहर रायबरेली ने क्रेता मरजीना पत्नी कज्जन निवासी 674 /2 बैहराना शहर रायबरेली को सदर तहसील रायबरेली के राजस्व ग्राम अख्तियारपुर की गाटा संख्या 61 भूमि क्षेत्रफल 63.25 वर्ग मीटर का बैनामा पंजीकृत हुआ है ।
उक्त बैनामें में कूटरचित नान जेड ए की खेतौनी गाटा संख्या 61 लगाई गई है।यह खतौनी प्रथम दृष्टया देखने मात्र से कूटरचित है। खतौनी में जिस लेखपाल का हस्ताक्षर बनाया गया

उक्त लेखपाल राघवेंद्र सिंह खतौनी में अंकित तिथि 12 नवंबर 2019 को सदर तहसील में कहीं पर भी तैनात नहीं था ।
खतौनी में स्पष्ट रुप से लिखा है की मिल्कियत हुकूमत सुबेजाती जब मालिकाना हक राज्य सरकार का था तो फिर एक साधारण व्यक्ति ने कैसे बैनामा किया और उस बैनामें का पंजीकरण उप निबंधक कार्यालय सदर रायबरेली ने क्यों कर लिया । यह भूमि हल्का लेखपाल ने आईजीआरएस पर एक शिकायत के निस्तारण करते हुए दिनांक 20 अगस्त 2019 को अपनी आंख्या में उक्त भूमि को नवीन पऱती बताया है। जो मिलकियत जिलाधिकारी रायबरेली है । इस तरह से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर उप निबंधक कार्यालय सदर रायबरेली की सांठगांठ से सरकारी भूमि को हड़पने का खेल चल रहा है । शिकायत कर्ता ने उक्त कूटरचित एवं धोखाधड़ी कर सरकारी संपत्ति हड़पने में शामिल सक्रिय भूमाफिया और संरक्षण प्रदान करने वाले अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्यवाही करने की मॉग की है ।
इस पूरे मामले पर सब रजिस्टार प्रभाष सिंह ने बताया है कि हमने खतौनी की जांच के लिए तहसीलदार सदर को भेजा हैं, जांच में खतौनी फर्जी निकली हैं।क्रेता ,विक्रेता समेत उपनिबंधन कार्यालय के एक कर्मचारी को नोटिस दी है ,अभी सब के जवाब नही आये हैं, जवाब आते ही पूरी फाइल अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व को भेजेंगे। सबसे चौंकाने वाली बात यह हैं कि कार्यलय का भृष्ट बाबू अभी भी उसी पटल पर जमा हुआ है। सब रजिस्टार से जब सवाल किया गया कि आखिर एफआईआर कौन दर्ज करायेगा तो उन्होंने कहा कि तहसील प्रशासन को कराना चाहिए।उधर तहसील प्रशासन ने सब जानते हुए कि फर्जी खतौनी के माध्यम से सरकारी ज़मीन की रजिस्ट्री हुई हैं तब भी किसी अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराने के बजाय मामले पर भ्रष्टाचार की चादर डाल कर फिलहाल सो चुके हैं।

उधर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व से जब मामले के बारे में जानकारी ली गयी तो उन्होंने कहा कि जब हमारे पास सब रजिस्टार फ़ाइल भेजेंगे तब हम जांच करके निर्णय लेंगे।
कुल मिलाकर जब निबन्धन कार्यालय और तहसील के अधिकारी भ्रस्टाचार का खेल आपस मे मिलकर खेलने लगे तो सरकारी ज़मीन की खरीद फरोख्त होना कोई बड़ी बात नही लगती। भ्रस्टाचार करने वाले अधिकारी कर्मचारी जानते हैं कि उनके पास पैसा है सब को खरीद लेंगे। अब देखना है कि इस मामले में सब रजिस्टार या फिर तहसील प्रशासन जालसाजों के खिलाफ एफआईआर कराते हैं की नही ।

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