पूज्य गुरूदेव श्री सौभाग्यमल जी म.सा. की 35वीं पुण्यतिथि मनायी गयी
बांसवाडा से अरूण जोशी की रिपोर्ट
पुण्य दिवस महापुरूषों का मनाया जाता है -महासती पूज्या पुण्यशीला जी म.सा
बांसवाड़ा । कुशलगढ़ वर्धमान स्थानक भवन में विराजित महासती पुण्यशीला जी म.सा आदि ठाणा-4 के सानिध्य में शुक्रवार को पुज्य सौभाग्यमल जी म.सा की 35वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य पर धर्मसभा में फरमाया कि ‘‘जो जीवन को अच्छी तरह से वास्तविकता को समझकर उस जीवन से महान जीवन बनाकर संसार के समक्ष आदर्श उपस्थित करते है, उन्हीं महापुरूषों का पुण्य दिवस मनाया जाता है। महान आत्मा गुलाब के फुल की तरह अनवरित होती है, अपने पुष्पों से संसार को सुगंधित करती है तथा मुरझातें हुए भी अपनी सुंगध की कीर्ति को फैलाते है। ऐसे महान पुरूष थे ‘‘पूज्य गुरूदेव सौभाग्यमल जी म.सा‘‘ जिन्होने अपने जीवन का एक-एक कण-क्षण सत्य सेवा में व्यतित कर दिया। जिन्हों ने रत्न की तरह अपने जीवन को चमका दिया। वे प्रसिद्धवक्ता, संगठनप्रेमी व मानवता के मसिहा थें, इसलिए ऐसे महोपुरूषों को आज 35 वर्षों के बाद भी श्रद्धा सहित याद जाना उनके विस्तृत अभिनंदनीय-अभिवंदनीय व्यक्तित्व का परिचायक हैं। प्रचारमंत्री विशाल गादिया ने जानकारी देते हुए बताया कि पूज्या श्री के सानिध्य में तपस्या की झडी लगी हुई है। प्रशान्त नाहटा 20 उपवास, श्रेयांश गादिया 19 उपवास, सुमित्रा डोसी व रूचिका काॅवडिया 17-17 उपवास, अदिति मेहता व राजल बहन डोसी 13-13 उपवास, प्रकाश वोहरा व विजय नाहटा 11-11 उपवास, संजय एम गादिया व लोकेश बाठिया 10-10 उपवास, अरविंद खाबिया 7 उपवास की तपस्या कर मासक्षमण की ओर अग्रसर है। सभा का संचालन गौतम खाबिया ने किया व अन्य कई प्रवक्ताओं ने अपने विचार रखें।
