एसयूवी से चलती है और करोड़ों के मकान में रहती है फिर भी ठेले पर बेंचती है छोले कुलचे
गुड़गांव । कहते हैं जिसने परिस्थितियों के आगे घुटने न टेक कर उनसे मुकाबला किया वह जिन्दगी में सफलता की ऊंचाइयां पाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है गुरुग्राम की रहने वाली उर्वशी यादव की। उर्वशी के पति एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तब से वह ज्यादा देर तक चल-फिर नही पाते। आर्थिक स्थिति बिगडती देख उर्वशी ने छोले-कुलचे का ठेला लगाना शुरू कर दिया। आज उर्वशी पूरे परिवार का खर्च उसी

दुकान से चला रही है। उर्वशी ने बातचीत के दौरान उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों की कहानी बयां की।
उर्वशी यादव दिल्ली की रहने वाली हैं। स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद इन्होंने इन्टरकॉन्टिनेंटल होटल, दिल्ली में फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव के रूप में कुछ दिन काम किया । 2004 में हरियाणा के रहने वाले रिटायर्ड विंग कमांडर एन के यादव के पुत्र अमित यादव के साथ उर्वशी का विवाह हुआ।अमित उस समय एक बड़ी कंपनी में मेनेजर के रूप में काम कर रहे थे।अमित की सैलरी काफी अच्छी थी। जिससे परिवार के दिन मजे में कट रहे थे। उनका हरियाणा में अपना खुद का घर लग्जरी गाड़ी व लग्जरी जिन्दगी के सारे संसाधन हैं।
पति के एक्सीडेंट से टूटा मुसीबतों का पहाड़
उर्वशी बताती हैं “साल 2010 में पति के सडक दुर्घटना का शिकार हो गए। इस दौरान उनका हिप(कूल्हा) टूट गया। उर्वशी ने उन्हें कई डाक्टरों को दिखाया लेकिन उनका कूल्हा ठीक नही हुआ आपरेशन के बाद वह चलने-फिरने लगे। उन्होंने फिर से नौकरी ज्वाइन की जिससे कंडीशन नार्मल हो गई। लेकिन दो साल बाद फिर से उनका एक्सीडेंट हो गया। इस बार उनका कूल्हा फिर से चोटिल हुआ। अब डाक्टरों ने आपरेशन से भी इनकार कर दिया। वह ज्यादा देर तक खड़े भी नही हो पाते हैं। जिसके बाद उनकी नौकरी भी छूट गई। जिसके बाद हमारे खुशहाल परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ”
आर्थिक स्थिति बिगड़ने से शुरू हुई मुश्किलें
उर्वशी बताती हैं ” पति की नौकरी छूटने के बाद हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ गई। पति ने नौकरी के दौरान घर में सभी सुख सुविधाओं की व्यवस्था कर दी थी, लेकिन घर चलाने व बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत पड़ी। जिसके बाद मैंने खुद से कुछ करने की ठानी। लेकिन नौकरी कर के मै नौकरी और घर दोनों जगह नही सम्भाल सकती थी। ”
पति की बनाई चीजों को बचाने के लिए शुरू किया बिजनेस
उर्वशी बताती हैं ” पति ने नौकरी के दौरान सारी सुख-सुविधाओं की व्यवस्था की थी। लेकिन मैं चाहती थी की उनके नौकरी जाने के बाद भी सारी चीजें बरकरार रहें। इसलिएजब मुझे कोई विकल्प नही मिला तो मैंने सेक्टर-14 में एक ठेला लगाना शुरू किया। मै इस पर पूड़ी सब्जी, व छोले कुलचे बेंचती थी। धीरे-धीरे कुछ समय में हमारी दुकान के छोले कुलचे फेमस हो गए और हमारी दुकान चल निकली। लेकिन मै एक रेस्टोरेंट खोलना चाहती थी। जिसके लिए मुझे पॉश इलाके में जगह चाहिए थी। ”
6 महीने पहले शुरू किया रेस्टोरेंट पर हुई असफल
उर्वशी बताती हैं “6 माह पहले मैंने अपना रेस्टोरेंट शुरू कर दिया। लेकिन मुझे रेस्टोरेंट चलाने का कोई ख़ास अनुभव नही था। दूसरी बात रेस्टोरेंट के बिजनेस में मै एक जगह फेल हो गई । मुझे विश्वासपात्र और मेहनती कर्मचारी नही मिले। नतीजन मुझे रेस्टोरेंट में घाटा लगने लगा और मेरा रेस्टोरेंट बंद हो गया। ”
फिर से शुरू की दुकान
उर्वशी बताती है “रेस्टोरेंट बंद होने के बाद मैंने फिर से अपनी दुकान शुरू की। गुरुग्राम के अतुल कटारिया शाप पर मेरी दुकान चल रही है। हांलाकि मैंने जीवन में एक बात सीखी है कि कभी हार माण कर घर नही बैठना चहिए, अगर आप नियमित रूप से परिश्रम कर रहे हैं तो आपको सफलता मिलनी तय है।
